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श्रीमज्जिनेन्द्र पार्श्वनाथ महापञ्चकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव….

अत्यन्त मनोहारी दक्षिण भारतीय शिल्पशैली में निर्मित नव-प्रतिष्ठित मूलनायक श्री १००८ मुनिसुव्रतनाथ भगवान् की दिव्य, दर्शनीय तथा अतिशयकारी प्रतिमा का भव्य पावन प्रतिष्ठा महोत्सव श्री १००८ मुनिसुव्रतनाथ जिनालय, करनाल में अत्यन्त श्रद्धा तथा भक्ति भाव के साथ आयोजित किया जा रहा है। यह प्रतिमा अपनी अनुपम कलात्मकता, सौम्य भाव-भङ्गिमा तथा दिव्य आभा के कारण दर्शक मात्र को भावविभोर कर देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जो श्रद्धालु एक बार इस प्रतिमा के दर्शन कर लेता है उसकी दृष्टि वहीं स्थिर हो जाती है तथा हृदय श्रद्धा भाव से परिपूर्ण हो उठता है। प्रतिमा के वेदी पर विराजमान होने से पूर्व ही इसके अतिशय साक्षात् अनुभव किए जा रहे हैं जिससे मन की समस्त आकुलताएं सहज ही शान्ति में परिवर्तित हो जाती हैं।

इसी पावन अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज करनाल के तत्त्वावधान में श्री १००८ पार्श्वनाथ जिनबिम्ब महापञ्चकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव तथा विश्व शान्ति महायज्ञ का भव्य आयोजन दिनाङ्क १५ फरवरी २०२६ से २० फरवरी २०२६ तक सम्पन्न होने जा रहा है। यह महोत्सव परम पूज्य राष्ट्रसन्त गणाचार्य श्री १०८ विरागसागर जी महामुनिराज के मङ्गल आशीर्वाद से उनके परम प्रभावक शिष्य श्रमण अनगाराचार्य श्री १०८ विनिश्चयसागर जी मुनिराज ससङ्घ के पावन सान्निध्य में तथा परम पूज्य ब्राह्मी लिपि प्रचारक श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी के मङ्गल निर्देशन में सम्पन्न होगा।

महोत्सव के प्रथम दिवस १५ फरवरी को गुरुदेव के मङ्गल प्रवेश के साथ देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, घट यात्रा, आचार्य निमन्त्रण, ध्वजारोहण, पाण्डाल तथा मण्डप उद्घाटन, स्थल शुद्धि एवं यागमण्डल विधान की पावन क्रियाएं सम्पन्न होंगी। रात्रिकालीन बेला में शास्त्र सभा के साथ गर्भ कल्याणक की आन्तरिक विधियां सम्पन्न की जाएंगी।

१६ फरवरी को गर्भ कल्याणक के उत्तरार्ध में अभिषेक शान्तिधारा नित्य पूजन गर्भ कल्याणक पूजन तथा हवन सम्पन्न होगा तत्पश्चात माता वामा देवी की गोद भराई महारानी वामादेवी का जागरण माता का श्रृङ्गार सोलह स्वप्न दर्शन तथा जैन महिला मण्डल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

१७ फरवरी को जन्म कल्याणक के अवसर पर अभिषेक शान्तिधारा नित्य पूजन उपरान्त तीर्थङ्कर प्रभु का जन्म सौधर्म इन्द्र द्वारा दर्शन शोभायात्रा पाण्डुकशिला पर जन्माभिषेक तथा दिन में तीर्थङ्कर बालक का भव्य श्रृङ्गार सम्पन्न होगा। रात्रि में सौधर्म इन्द्र सभा आनन्द उत्सव ताण्डव नृत्य पार्श्वकुमार का पालना झूलन तथा बाल क्रीडा के कार्यक्रम आयोजित होंगे।

१८ फरवरी को तप कल्याणक के अन्तर्गत महाराजा अश्वसेन का दरबार पार्श्वकुमार का पाणिग्रहण त्याग लोकान्तिक देवों द्वारा स्तवन पालकी प्रस्थान दीक्षा विधि अङ्कन्यास तथा संस्कारारोपण सम्पन्न होगा। रात्रिकाल में भारत के प्रमुख कवियों द्वारा विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

१९ फरवरी को केवलज्ञान कल्याणक की पावन शृङ्खला में प्रातः नित्यमह पूजन उपरान्त आचार्य श्री का मङ्गल उद्बोधन मुनि पार्श्वनाथ की प्रथम आहारचर्या अधिवासना तिलक दान नेत्रोन्मीलन सूरि मन्त्र तथा प्राण प्रतिष्ठा की विधियां सम्पन्न होंगी। अपराह्न बेला में पार्श्व प्रभु के केवलज्ञान तथा समवसरण सभा का अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं के सम्मुख प्रस्तुत होगा।

२० फरवरी को मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण पूजा विश्व शान्ति महायज्ञ के पश्चात शोभा यात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हुए नवीन वेदी में बिम्ब स्थापना होगी फिर कलशारोहण ध्वजारोहण तथा हवन के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा।

आयोजन समिति द्वारा बाहर से पधारने वाले समस्त श्रद्धालुओं के लिए आवास तथा शुद्ध भोजन की समुचित सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है। सकल दिगम्बर जैन समाज करनाल समस्त साधर्मी बन्धुओं से विनम्र निवेदन करता है कि वे इस ऐतिहासिक धर्मप्रेरक तथा अतिपावन महामहोत्सव में सपरिवार पधारकर धर्मलाभ प्राप्त करें तथा आयोजन की गरिमा को और अधिक उज्ज्वल बनाएं।

निवेदक -वीरेश जैन प्रधान श्री दिगम्बर जैन सोसायटी, करनाल