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जलवायु परिवर्तन और हमारी भूमिका….

12 दिसंबर 2015 को पेरिस में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP21) में विश्व के 196 देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी सहमति दी थी, जिसे पेरिस संधि के नाम से जाना जाता है। भारत भी उन देशों में शामिल है जो इस संधि का हिस्सा बने। जलवायु परिवर्तन का असर केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व पर हो रहा है। अंटार्कटिका में बर्फ पिघलने से लेकर भारत, पाकिस्तान और म्यांमार में आई भयंकर बाढ़ जैसी घटनाएं इसके प्रमाण हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), जो कि संयुक्त राष्ट्र की एक महत्वपूर्ण एजेंसी है, के 193 सदस्य देश हैं। यह संगठन पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और उनसे निपटने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य करती है। दिसंबर 2023 में आई WMO की रिपोर्ट (2010-2020) के अनुसार, 2013 में उत्तराखंड में आई तबाही, जिसमें 5600 से अधिक लोगों की मौत हुई, और 2018 में केरल में आई बाढ़ और चक्रवात अम्फान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भारी तबाही मचाई, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ भी जलवायु परिवर्तन के कारणों में शामिल हैं।

आज जलवायु परिवर्तन दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर आया है, जिससे निपटने के लिए पूरा विश्व संवेदनशील है। भारत भी इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत सरकार ने अनेक योजनाएं शुरू की हैं। जैसे कि नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (NAPCC) जो कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करती है। इस योजना के तहत 8 मिशन हैं, जिनमें सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, सतत कृषि, जल संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, हरित भारत, सतत आवास और जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक ज्ञान सम्मिलित हैं।

सरकार की पहल :

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ग्रीन स्किल्स डेवलपमेंट प्रोग्राम (GSDP) शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है। भारत सरकार ने 2020 में नई शिक्षा नीति में भी पर्यावरण संरक्षण को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। इस नीति के तहत छात्रों को प्रारंभ से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य है कि भविष्य की पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझे और इसमें सक्रिय भूमिका निभाए।

विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने *एक पेड़ माँ के नाम* से अभियान की शुरुआत की, और इस अभियान के अंतर्गत पूरे देश में लाखों पेड़ लगाए जायेंगे | इस पूरे अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण से है जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा- भरा पर्यावरण सुनिश्चित हो सके |

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक कदम:

हरित ऊर्जा का उपयोग: सौर और पवन ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।

पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग: संसाधनों का पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग प्रोसेस को बढ़ावा दिया जाए ताकि कचरे को कम किया जा सके।

वनों की सुरक्षा और वृक्षारोपण: वनों की सुरक्षा और वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए ताकि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित किया जा सके।

जन जागरूकता अभियान: लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाए।

प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयारियाँ: सरकार को प्राकृतिक आपदाओं के लिए पर्याप्त तैयारी और प्रबंधन की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

देश भर में कई संघठन भी इस दिशा में सरकार का सहयोग कर रहे है और उनसे जुड़े स्कूल भी जलवायु परिवर्तन को लेकर बेहतर कार्य कर रहे है | निसा जो की भारत में प्राइवेट स्कूलों का सबसे बड़ा संघठन है से जुड़े पूरे भारत में कई ऐसे स्कूल हैं जो पर्यावरण को लेकर बेहतरीन कार्य कर रहे है| इनमे से एक है *आगरा में स्थित प्रील्यूड पब्लिक स्कूल, जो की पर्यावरण मंत्रालय द्वारा क्षेत्र का सबसे बेहतरीन स्कूल भी चुना गया है| यह स्कूल पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त है और जल संचयन के क्षेत्र में बहुत बढ़िया तरीके से कार्य कर रहा है| इसके अलावा कूड़ा प्रबंधन में स्कूल पुरे शहर में बेहतर कार्य कर रहा है | स्कूल के बच्चे जलवायु परिवर्तन के बारे में बेहतर तरीके से समझ रहे हैं, इस दिशा में प्रील्यूड पब्लिक स्कूल आगरा और देश में जलवायु परिवर्तन के लिए किये अपने कार्यों से एक आदर्श स्कूल के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है और पर्यावरण के प्रति कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है |*

इसके अलावा सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी, जो भारत की एक प्रतिष्ठित शोध आधारित संस्था है, पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर *’ब्लू करिकुलम फॉर लाइफ’* नामक एक पहल चला रही है। इस पहल के अंतर्गत संस्था ने दिल्ली में आयोजित 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 35 स्कूल शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। इसका उद्देश्य शिक्षकों को इस तरह तैयार करना है कि वे छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक पहलुओं से जोड़ सकें। *’ब्लू करिकुलम’* छात्रों को अपने समुदायों के साथ जुड़ने और वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक और स्थायी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इसके साथ ही हम व्यक्तिगत रूप से भी कुछ छोटी – छोटी अच्छी आदतों को अपनाकर भी पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद कर सकते है, जैसे प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए, बाहर जाते समय अपने पानी के बोतल जरूर लेके जाएं, इस समय बारिश का मौसम है हमे कम से कम एक पौधा अपने घर और मोहल्ले में जरूर लगाना चाहिए |

जलवायु परिवर्तन आज एक ऐसी चुनौती है जिससे निपटने के लिए समग्र और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अपने प्रयासों को तेज करे। इसके लिए सरकार, निजी क्षेत्र, और आम जनता को मिलकर कार्य करना होगा। भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जो पहल की हैं, वे निश्चित रूप से सराहनीय हैं, लेकिन इसके लिए और भी अधिक समर्पण और प्रयास की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि पर्यावरण की सुरक्षा ही हमारी आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा है। अगर हम आज जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कदम नहीं उठाएंगे, तो भविष्य में हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए, यह समय की मांग है कि हम सभी मिलकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस और कारगर कदम उठाएं।