लाइव कैलेंडर

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  

LIVE FM सुनें

India News24x7 Live

Online Latest Breaking News

साधु समाज की धरोहर है। आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महराज…

चंडीगढ़ दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे गुरुदेव सुबल सागर जी महाराज के दर्शनों को पधारे लखनऊ से 17-20 लोग और अहदाबाद से 8-10 लोग, भिण्ड से 10 लोग। ऐ सभी लोग अपने गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आए क्यों कि जिस प्रकार हम मोबाइल को चार्ज करते है और दिन भर उससे काम लेते है उसी प्रकार हमारे गुरुदेव एक पावर बैंक है जिससे जगह-जगह से भक्त गण आते है उसके आशीर्वाद से अपने आप को चार्ज करते है।

संत महाराज इस जगत की धरोहर है। इनके आशीर्वाद से ही सारा संसार चलता है। जहाँ जहाँ साधु महाराज महाराज के चरण पड़ते है वहाँ वहाँ की बंजर भूमि की उपजाऊ हो जाती है। सूखे कुओं में भी पानी लब लबाकर भर जाता है उनके आशीर्वाद से । दुखी गरीब व्यक्ति भी श्रद्धा के साथ इनके दर्शन करने से माला माल ‘हो जाते है। हमारे साधु महाराज ने तो सब कुछ त्याग दिया अपने धर्म की खातिर अर्थात् अपने माँ- बाप, भाई-बहिन, मित्र-परिवार सभी सदस्य यहाँ तक अपने शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं रखा। क्योंकि परिग्रह ही समस्त दुःखों को उत्पन्न करने वाला कहा है। इस जगत में देखने में आता है कि जिन्होंने कुछ त्याग दिया तो उन्हें कुछ मिलता है और जिन्होंने थोड़ा कुछ और त्याग दिया है तो उन्हें थोड़ा कुछ और मिल जाता है। और जिन्होंनेसब कुछ ही त्याग दिया है उनके पीछे समस्त संसार की वस्तुऐ भागती रहती है लेकिन वह उन्हें गहण नहीं करते है यही त्याग की है। गुरुदेव के चरणों में हमारे देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक आदि बड़े- बड़े नेता लोग उनके दर्शन कर उनसे आशीर्वाद वा मार्गदर्शन लेने आते है।

साधु महाराज के चरण पड़ने से समाज में एकता की वृद्धि होती हैं, टूटे हुए हृदयों में प्रेम- वात्सल्य का प्रवाह बहने लगता है। धर्म की प्रभावना होती है, पुण्य का धन भंडार भरता है। और पुण्य से ही सभी प्रकार की सामग्री प्राप्त होती है जिससे मनुष्यों के जीवन में सुख की वृद्धि होती है। सुख शांति का प्राप्त होना ही प्राप्त होना ही संसारी जीवों की सबसे बड़ी सम्पत्ति है। इसलिए ऐसे गुरु महाराज के दर्शन कर आपने जीवन को धन्य करें । यह जानकारी बाल ब्रह्मचारिणी गुंजा दीदी एवं श्री धर्म बहादुर जैन जी ने दी |