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प्राचीन कला केन्द्र एवं वायलिन अकादमी पुणे की ओर से आयोजित ‘‘स्वर झंकार’’ के 15 वें संस्करण में वायलिन एवं शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियां…

प्राचीन कला केन्द्र एवं वायलिन अकादमी पुणे द्वारा आज यहां एवं विशेष संगीत संध्या का आयोजन टैगोर थियेटर में सायं 6रू30 बजे से किया गया । इस कार्यक्रम में देश के जाने माने वायलिन वादक पंडित अतुल उपाध्याय एवं उनके सुपुत्र राजस उपाध्याय ने जुगलबंदी से दर्शकों का मन मोहा और साथ ही प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक जयतीर्थ मेवुंडी ले अपने सधे गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।

आज के कार्यक्रम में डायरेक्टर जनरल हैल्थ श्रीमती सोनिया खुल्लर हरियाणा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की । आज के कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चॉंद लगाए ।

कार्यक्रम के पहले भाग में पंडित अतुल उपाध्याय एवं उनके सुपुत्र राजस उपाध्याय ने खूबसूरत जुगलबंदी पेश की जिसमें इन्होंने राग किरवाणी में आलाप से शुरूआत की । उपरांत जोड़ झाला प्रस्तुत किया । पिता पुत्र की जोड़ी ने वायलिन की मधुर धुनों, खूबसूरत जुगलबंदी एवं सधे हुए हाथों से वायलिन की धुनों से दर्शकों को आनंदित किया । इनके साथ तबले पर मिथिलेश झा ने सधी हुई संगत करके खूब तालियां बटोरी ।

इसके उपरांत पंडित जयतीर्थ मेवुंडी ने मंच संभाला । इन्होंने राग जोग से कार्यक्रम की शुरूआत की और पारम्परिक आलाप लेकर रूपक ताल में निबद्ध बंदिश ‘‘वो बलमा’’ प्रस्तुत किया। उपरांत तीन ताल में तराना पेश किया । इसके बाद राग शिव अभोगी में आड़ा तीन ताल की रचना ‘‘कुछ न सुहावे ’’पेश की और इसके उपरांत एक और बंदिश ‘‘मन मंदिर जगमगाए’’जो कि आड़ा चौताल में थी पेश करके दर्शकों को आनंदित किया । कार्यक्रम के अंत में इन्होंने ‘‘गोबिन्द के गुण गावो’’ भजन पेश किया । इनके साथ तबले पर श्री विनोद लेले और हारमोनियम पर सुमित मिश्रा ने बखूबी संगत की ।

कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।

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