त्रिवेणी संगीत सभा के उद्घाटन सत्र में रागिनी शंकर के वायलिन वादन ने मोहा चंडीगढ़ वासियों का दिल….
चंडीगढ़, 24 अक्टूबर 2025: त्रिवेणी संगीत सभा द्वारा आज शाम सेक्टर 16 ए स्थित ‘श्रृंगार’ (मकान नं. 242) में एक भव्य और स्मरणीय संगीत संध्या का आयोजन किया गया। संस्था के इस उद्घाटन सत्र में देश की जानी-मानी और प्रतिभाशाली वायलिन वादिका रागिनी शंकर के शानदार हिंदुस्तानी शास्त्रीय वायलिन वादन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में तबले पर प्रख्यात वादक श्री अभिषेक मिश्रा ने संगति की, जिनकी थाप और जुगलबंदी ने प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए।
वाराणसी में जन्मी और संगीत के प्रतिष्ठित घराने से ताल्लुक रखने वाली रागिनी शंकर, महान पद्मभूषण डॉ. एन. राजम की पोती और प्रख्यात वायलिन वादिका डॉ. संगीता शंकर की पुत्री हैं। आज के कार्यक्रम में उन्होंने अपनी दादी द्वारा विकसित की गई प्रसिद्ध ‘गायकी अंग’ शैली का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वायलिन के तारों पर जब उन्होंने गायन की बारीकियों और हरकतों को उतारा, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मात्र 4 वर्ष की आयु से प्रशिक्षण शुरू करने वाली रागिनी की कलात्मक गहराई और उनकी मैकेनिकल इंजीनियरिंग व संगीत की शिक्षा से उपजी विश्लेषणात्मक सटीकता आज उनके वादन में साफ झलक रही थी।
यूरोपलिया, सवाई गंधर्व, डोवर लेन और पेरिस के थिएटर डे ला विले जैसे वैश्विक मंचों पर भारत का नाम रोशन कर चुकीं रागिनी शंकर ने चंडीगढ़ की इस शाम को बेहद समृद्ध और ऐतिहासिक बना दिया। वायलिन की शास्त्रीय प्रस्तुति के साथ-साथ उनके विविध फ्यूजन प्रोजेक्ट्स जैसे ‘ताराना’, ‘द इंक बैंड’ और ‘इनस्ट्रिंग्स’ की झलक भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा के रूप में महसूस की गई।
कार्यक्रम के सफल समापन पर त्रिवेणी टीम की ओर से श्रीमती प्रिमिला पुरी ने मुख्य कलाकार रागिनी शंकर, तबला वादक श्री अभिषेक मिश्रा और शहर के प्रबुद्ध संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगीत सभा का यह सफर आगे भी चंडीगढ़ में इसी तरह शास्त्रीय संगीत की अविरल धारा बहाता रहेगा। इस अवसर पर शहर की कई जानी-मानी हस्तियां और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।


