संघ गीतायनम्’ संगीत व नृत्योत्सव में संगीत और नृत्य के माध्यम से गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश…..
पंचकूला, 17 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष और राष्ट्रीय गीत ‘वन्देमातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ गीतायनम्’ संगीत व नृत्योत्सव में संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया गया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला तथा अखिल भारतीय सांस्कृतिक संगठन संस्कार भारती की पंचकूला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में यह विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम सेक्टर-1, पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी अतिथि गृह के सभागार में आयोजित किया गया।
‘संघ गीतायनम्’ का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष (1925-2025) पूर्ण होने तथा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत ‘वन्देमातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ (1875-2025) के ऐतिहासिक अवसरों को समर्पित था। कार्यक्रम में संगीत निर्देशक अरुण कांत के निर्देशन में संघ गीतों और नृत्यों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव की भावना का संचार किया। सामूहिक संगीत प्रस्तुतियों में जो गीत गाये गये, उनमें से कुछ के बोल हैं- हिन्दू जगेगा, विश्व जगेगा; निर्मल पावन भावना,सबके मन की कामना; चले-चले हम निशिदिन अविरत; हे जन्मभूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत; हम करें राष्ट्र आराधन आदि। जिन गीतों पर सामूहिक कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया गया वे हैं- साधना के देश में मत नाम ले आराम का; निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें: हिन्दू भूमि की हम सन्तान, नित्य करेंगे इसका ध्यान ! सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा, राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण के संकल्प तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में पंचकूला नगर निगम के महापौर श्री श्यामलाल बंसल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके अलावा अन्य गणमान्य व्यक्तियों में सुखमिंदर कौर बराड़, अध्यक्षा, चण्डीगढ़ संगीत नाटक अकादमी, ज्ञानचन्द गुप्ता, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, कैलाश मित्तल एवं अरविन्द शर्मा, संरक्षकगण आदि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने बोलते हुए कहा की हमारा देश पुनः विश्व गुरु बनेगा इसमें कोई संशय नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष और राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम के 150 वें वर्ष पर हम गर्व का अनुभव करते हैं। हमें अपने प्रिय देश की चहुंओर की प्रगति के लिए कटिबद्ध रहें ऐसी प्रेरणा आज के कार्यक्रम से हमें मिलती है।
‘संघ गीतायनम्’ की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और देश के प्रति समर्पण की भावना प्रमुखता से उभरी। संघ गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘वन्देमातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व तथा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस राष्ट्रीय गीत की प्रेरणादायी भूमिका को भी स्मरण किया गया। यह सांस्कृतिक संध्या देश की गौरवशाली परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों को कला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रयास रही। कार्यक्रम ने नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के महत्व से जोड़ने का संदेश दिया।
मयंक बिंदल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य संगीत और नृत्य के माध्यम से समाज में विशेषकर युवा शक्ति में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना था। ‘संघ गीतायनम्’ ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम की भावना को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करते हुए सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के महत्व को रेखांकित किया।


