गो माता के रोम-रोम में 33 कोटि देवता वास करते हैं: गोपालमणि…..
श्री गोपाल गोलोक धाम, कैम्बवाला, चण्डीगढ़ द्वारा पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के पावन अवसर पर आयोजित सात दिवसीय धेनुमानस गौ कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास गो गंगा कृपाकांक्षी पूज्य श्री गोपाल मणि जी महाराज ने कथा के द्वितीय दिवस पर उपस्थित गोभक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भी भारतीय समाज में गोवंश को ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है। इसी गौरव के कारण हमारे देश को इंडिया नहीं, बल्कि ‘भारत’ ही कहा जाना चाहिए। उन्होंने कथा में उपस्थित सभी गोभक्तों को संकल्प दिलाया कि आज से सभी अपने देश को केवल ‘भारतवर्ष’ नाम से ही संबोधित करेंगे।
कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने शास्त्रों का प्रमाण देते हुए बताया कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, तो सबसे पहले गो माता को ही पृथ्वी पर भेजा था। सृष्टि में मात्र गाय ही एक ऐसा जीव है जो स्पष्ट रूप से ‘माँ’ शब्द का उच्चारण करती है; इसीलिए माना जाता है कि ‘माँ’ शब्द की उत्पत्ति भी गोवंश से ही हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि हमें गो कथा से यह परम प्रेरणा मिलती है कि भारतीय गो माता के रोम-रोम में 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवता वास करते हैं। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजभूमि में लीला करते हुए कहा था कि यदि पूजा अनुष्ठान में कोई भी देवता छूट जाए, तो तरण-तारणी, वैकुंठ-वासिनी माँ भगवती गो माता की पूजा कर लेने से सभी देवी-देवता स्वतः ही प्रसन्न हो जाते हैं।
कथा के दौरान ‘गो माता, राष्ट्र माता’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ भजनों की अमृत वर्षा हुई। इस अवसर पर पूज्य आचार्य सीताशरण जी महाराज ने गो कथा की महिमा का गुणगान किया और भावपूर्ण भजन-कीर्तन से संगतों को निहाल किया। कथा की पूर्णाहुति पर महाआरती की गई और तत्पश्चात विशाल भंडारे में प्रसाद वितरित किया गया।
इस धार्मिक आयोजन में संत नवीन सरहदी जी महाराज (पीठाधीश्वर, श्री बाल्मीकि शक्ति पीठ, सेक्टर 24, चण्डीगढ़) सहित ट्राइसिटी (चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली) की विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने हाजिरी भरी। कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से आए सैकड़ों गोभक्तों ने भाग लेकर पुण्य कमाया। इस मौके पर गोलोक धाम की समस्त कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सेवादार विशेष रूप से उपस्थित रहे।


