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गिद्दड़बाहा निगम कमेटी प्रधान पर रिश्तेदार के साथ करोड़ों की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप…..

करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और बैंक खातों के दुरुपयोग के मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी और कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए गिद्दड़बाहा निवासी संजीव जैन और उनके परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार ने गिद्दड़बाहा निगम कमेटी के प्रधान एवं पार्षद **गौरव जैन (चिन्नू)**, उनके पिता **सुभाष जैन (लिली), जो जैन समाज के मंगल देश के पूर्व प्रधान रह चुके हैं,** तथा रिश्तेदार राकेश जैन (बबलू) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, परिवार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी व्यक्ति को बिना जांच के दोषी नहीं ठहरा रहा।

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजीव जैन ने बताया कि गिद्दड़बाहा में उनका **M.R. Sanjeev & Company** के नाम से आढ़त का व्यवसाय है। पिछले कुछ वर्षों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें अपने व्यवसाय से दूर रहना पड़ा और डॉक्टरों ने उन्हें तनाव से बचने की सलाह दी। पीड़ित के अनुसार, **इसी दौरान उनके करीबी रिश्तेदारों ने उनकी गैर-मौजूदगी और बीमारी का कथित रूप से फायदा उठाया।**

संजीव जैन का आरोप है कि उनके **ICICI Bank और HDFC Bank खातों के चेकों पर उनके जाली हस्ताक्षर करके लगभग 1.50 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए तथा कुछ रकम कथित रूप से नकद भी निकाली गई।** परिवार का यह भी आरोप है कि इस कथित जालसाजी में संबंधित बैंक कर्मचारियों की भी संभावित संलिप्तता की जांच की जानी चाहिए। परिवार की मांग है कि बैंक कर्मचारियों की भूमिका, बैंक रिकॉर्ड, चेक, हस्ताक्षर और सभी संबंधित खातों की गहन जांच कर यह पता लगाया जाए कि रकम किन खातों में और किस तरीके से ट्रांसफर हुई तथा कितनी रकम नकद निकाली गई।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना **एक कथित जाली Power of Attorney** भी तैयार की गई। संजीव जैन के अनुसार, उस समय वह अपने बेटे के इलाज के सिलसिले में चंडीगढ़ में थे और सेक्टर-27 स्थित दिगंबर जैन मंदिर में रुके हुए थे। परिवार का आरोप है कि उनकी गैर-मौजूदगी में उनके दस्तावेजों और व्यवसाय से जुड़े मामलों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी **Creta कार, जिसका नंबर PB-53-B-0093 है और जो संजीव जैन के नाम पर पंजीकृत है,** को भी कथित रूप से अपने कब्जे में ले लिया गया। परिवार का कहना है कि बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने और नकद निकालने, कथित जाली दस्तावेज तैयार करने और वाहन पर कब्जा करने जैसी घटनाओं के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

संजीव जैन ने बताया कि वह पहले से ही कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर चुके हैं और लगातार बीमारी के कारण व्यवसाय से दूर थे। पूरे विवाद और तनाव के बीच **संजीव जैन की तबीयत भी गंभीर रूप से बिगड़ गई और उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा, जहां मस्तिष्क में क्लॉट की समस्या सामने आई।** परिवार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी में डाल दिया।

परिवार के अनुसार, उन्होंने अपने साथ हुए कथित फ्रॉड और जालसाजी की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई, लेकिन शुरुआती स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इस संबंध में **SSP मुक्तसर अभिमन्यु राणा** से भी मुलाकात कर अपनी शिकायत और मामले की जानकारी दी। परिवार का आरोप है कि करीब चार महीने तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और बाद में उन्हें यह कहते हुए कार्रवाई करने से मना कर दिया गया कि **“इसमें कुछ कार्रवाई करने लायक है ही नहीं।”**

इसके बाद परिवार ने **Bureau of Investigation** का दरवाजा खटखटाया। परिवार के अनुसार, इसके बाद DGP के आदेशों के पश्चात **गौरव जैन, उनके पिता सुभाष जैन और रिश्तेदार राकेश जैन** के खिलाफ FIR दर्ज की गई। परिवार के अनुसार, FIR में **धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं** लगाई गई हैं।

परिवार का आरोप है कि **FIR दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।** परिवार के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए **बठिंडा के DSP लखविंदर सिंह, क्राइम जोन** को जांच मार्क की गई थी, लेकिन आरोप है कि वहां भी फाइल पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

परिवार का कहना है कि वह मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार आला पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक उसे न्याय नहीं मिला है।

परिवार ने यह **आशंका भी व्यक्त की है कि स्थानीय MLA की ओर से आरोपितों को कथित संरक्षण प्राप्त हो सकता है और उनके दबाव के चलते पुलिस कार्रवाई प्रभावित हो रही है।** परिवार ने इस संबंध में भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, परिवार स्पष्ट करता है कि वह किसी व्यक्ति को बिना जांच के दोषी नहीं ठहरा रहा, बल्कि इस पूरे पहलू की भी निष्पक्ष जांच चाहता है।

परिवार का कहना है कि **मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने और अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने से उनमें रोष और निराशा है।** उनका आरोप है कि उनके साथ कथित तौर पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है और वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

पीड़ित परिवार ने आशंका जताई है कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक या प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। परिवार का कहना है कि इसी कारण वह मामले की जांच स्थानीय स्तर से हटाकर किसी **वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पुलिस अधिकारी** से करवाए जाने की मांग कर रहा है।

परिवार ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति को बिना जांच के दोषी नहीं ठहरा रहा, बल्कि चाहता है कि लगाए गए सभी आरोपों, बैंक लेन-देन, दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और पुलिस कार्रवाई में हुई देरी की निष्पक्ष जांच हो।

पीड़ित परिवार ने पुलिस के आला अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच किसी **वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पुलिस अधिकारी** से करवाई जाए, कथित जाली चेक और हस्ताक्षरों की **जांच** करवाई जाए, लगभग 1.50 करोड़ रुपये के कथित बैंक लेन-देन, ट्रांसफर और नकद निकासी की पूरी जांच की जाए, कथित Power of Attorney और अन्य दस्तावेजों की सत्यता की जांच हो तथा वाहन PB-53-B-0093 से जुड़े सभी दस्तावेजों और उसके कब्जे की जांच की जाए। साथ ही FIR में लगाए गए आरोपों के आधार पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या जानबूझकर देरी सामने आती है, तो उसकी भी जांच की जाए। यदि किसी राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा पुलिस कार्रवाई को प्रभावित करने का कोई तथ्य सामने आता है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाए।

संजीव जैन और उनके परिवार ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं है। वे केवल चाहते हैं कि **पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, वास्तविक तथ्य सामने आएं और जो भी कानून के अनुसार दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई हो।**

परिवार ने कहा कि वह लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और अब उसे पुलिस के आला अधिकारियों से ही निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है।

**“हम किसी से बदला नहीं चाहते। हम सिर्फ अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी और जालसाजी की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार न्याय चाहते हैं।”**

Victim:- Sanjeev Jain 9915557149

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Gaurav Jain

9814700064

Subhash Jain

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Rakesh Jain

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DSP Lakhwinder Singh

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