धर्म बहादुर जैन अध्यक्ष श्री दिगम्बर जैन सोसाइटी ने निभाई सौधर्मेंद्र की भूमिका…..
श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आज उत्तम तप लक्षण की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की गई। प्रातःकाल मंदिर परिसर में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
आज के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य श्री सुनील जैन एवं श्री सुजीत जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा श्री भरत भूषण जैन एवं श्रीमती आभा जैन, सेक्टर-27 द्वारा की गई। द्वितीय शांतिधारा श्री राजेंद्र प्रसाद जैन एवं श्री जनित जैन, डड्डूमाजरा कॉलोनी, चंडीगढ़ द्वारा संपन्न की गई।
इस अवसर पर सौधर्मेंद्र की भूमिका श्री धर्म बहादुर जैन, मेम लता जैन, श्री अंकुश जैन एवं श्री अंकित जैन ने निभाई। वहीं कुबेर इंद्र की भूमिका श्री संदीप जैन एवं श्रीमती वनीता जैन, सेक्टर-45, चंडीगढ़ द्वारा निभाई गई।
उत्तम तप — आत्मशुद्धि एवं आत्मसंयम का मार्ग
जैन दर्शन में उत्तम तप का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। तप केवल उपवास या शारीरिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इच्छाओं, आसक्ति और इंद्रिय विषयों पर संयम रखते हुए आत्मचिंतन करने की साधना है। तप के माध्यम से मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को सीमित करना, सहनशीलता बढ़ाना और आत्मा की शुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना सीखता है।
दशलक्षण पर्व का उत्तम तप लक्षण श्रद्धालुओं को यह संदेश देता है कि बाहरी सुख-सुविधाओं के साथ-साथ आंतरिक शांति और आत्मिक विकास के लिए भी प्रयास आवश्यक है। त्याग, संयम, अनुशासन और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सात्विक एवं आध्यात्मिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। इस अवसर पर एडवोकेट आदर्श जैन , श्री संत कुमार जैन ,श्री शरद जैन ,श्री करुण जैन, श्री रमेश जैन, श्री दामोदर जैन, श्री नितिन जैन सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। श्री नवरत्न जैन, पूर्व अध्यक्ष ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। आज की भोजन वयवस्था एवं पूजन सामग्री श्री तिलक राज जैन ,उर्वशी जैन एवं पुनीत जैन की और से की गयी।
दशलक्षण पर्व के आगामी धार्मिक कार्यक्रमों में भी श्रद्धालुओं के उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपेक्षा है।


