लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  

LIVE FM सुनें

India News24x7 Live

Online Latest Breaking News

.82% भारतीयों के स्मार्टफोन को नुकसान हुआ, लेकिन केवल 15 में से 1 व्यक्ति अपने फोन की सुरक्षा करता है…..

चंडीगढ़, 19 अगस्त 2026: भारत की प्रमुख बीमा-प्रौद्योगिकी कंपनी वनअसिस्ट ने आज अपने नए उपभोक्ता अंतर्दृष्टि अध्ययन “द ग्रेट इंडियन स्मार्टफोन प्रोटेक्शन क्राइसिस” के नतीजे जारी किए। यह अध्ययन वनअसिस्ट ने वैश्विक बाजार अनुसंधान संस्था हंसा रिसर्च के साथ मिलकर किया है। इस रिपोर्ट में पूरे भारत में स्मार्टफोन के इस्तेमाल, फोन को होने वाले आकस्मिक नुकसान और फोन की सुरक्षा के लिए लिए जाने वाले सुरक्षा कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई है।

सुब्रत पाणि, वनअसिस्ट के को-फाउंडर, ने कहा, “यह शोध उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक दिलचस्प विरोधाभास को दर्शाता है। स्मार्टफोन लोगों के संवाद करने, लेन-देन करने, काम करने और मनोरंजन का साधन बने रहने के साथ-साथ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। वहीं, फोन का गलती से क्षतिग्रस्त होना भी एक आम अनुभव है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिना किसी सुरक्षा के अपने डिवाइस का इस्तेमाल करते रहते हैं और उन्हें फोन के खराब होने या टूटने की लगातार चिंता बनी रहती है। जैसे-जैसे डिवाइस अधिक महंगे होते जा रहे हैं और उनके इस्तेमाल की अवधि बढ़ रही है, उपभोक्ता अपने पूरे डिवाइस स्वामित्व के दौरान अधिक भरोसा और मानसिक शांति चाहते हैं। ऐसे में उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह किफायती, सरल और भरोसेमंद सुरक्षा समाधानों के जरिए उपभोक्ताओं की चिंताओं को बेहतर ढंग से दूर करे।”

रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों की स्मार्टफोन पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद बहुत कम लोग अपने फोन के लिए सुरक्षा योजना लेते हैं। फोन की बढ़ती कीमत, बार-बार होने वाले हादसे और लोगों का फोन लंबे समय तक इस्तेमाल करना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

आज स्मार्टफोन भारतीयों के काम करने, बैंकिंग, खरीदारी, बातचीत और मनोरंजन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। इसलिए स्मार्टफोन लोगों की रोजमर्रा की सबसे कीमती चीजों में से एक बन चुका है। फोन की कीमतें बढ़ रही हैं और लोग अपने फोन को पहले से ज्यादा लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में फोन के टूटने या खराब होने पर मरम्मत का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है।

फिर भी फोन का दुर्घटनावश टूटना या खराब होना आम बात है। अध्ययन के अनुसार, 82% लोगों ने कम से कम एक बार अपना स्मार्टफोन गलती से गिराया है, जबकि 72% लोगों के फोन को दुर्घटना के कारण नुकसान हुआ है। फोन गिरना और स्क्रीन टूटना नुकसान के सबसे आम कारणों में शामिल हैं। फोन को नुकसान पहुंचने का भावनात्मक असर भी काफी ज्यादा है। 35% भारतीयों ने फोन गिरने के तुरंत बाद घबराहट महसूस की, 24% लोगों का इस घटना को लेकर किसी से झगड़ा हुआ और 15% लोगों ने फोन खराब होने के कारण अपनी योजनाएं रद्द कर दीं। महिलाओं में फोन गिरने के बाद घबराहट पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखी गई। 43% महिलाओं ने फोन गिरने के बाद घबराने की बात कही, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 33% था। फोन के जेब या बैग से फिसलकर गिरने जैसी रोजमर्रा की घटनाएं भी नुकसान का बड़ा कारण हैं। अध्ययन के अनुसार, कुल आकस्मिक नुकसान की 36% घटनाएं फोन के जेब या बैग से गिरने के कारण होती हैं। यानी रोजमर्रा की एक छोटी-सी लापरवाही कई बार काफी महंगी साबित हो सकती है। इतना नुकसान होने के बावजूद, केवल 36% उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपने फोन के इस्तेमाल के दौरान कभी न कभी स्मार्टफोन सुरक्षा योजना ली है। वहीं, इस समय केवल 6–8% लोग ही सक्रिय रूप से ऐसे सुरक्षा कार्यक्रम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में उपभोक्ताओं के विभिन्न वर्गों के बीच व्यवहार से जुड़े उल्लेखनीय अंतर भी सामने आए हैं। महिलाएं सबसे अधिक निर्भर और सबसे अधिक संवेदनशील स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के रूप में सामने आईं। 79% महिलाएं सोशल मीडिया के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करती हैं (पुरुषों में 69%), 94% महिलाओं से उनका डिवाइस गलती से गिर चुका है (पुरुषों में 80%), और 79% महिलाओं के फोन को आकस्मिक नुकसान पहुंचा है (पुरुषों में 71%)। फोन गिरने के बाद भावनात्मक प्रतिक्रिया भी महिलाओं में अधिक तीव्र रही—43% महिलाओं ने फोन गिरने के बाद घबरा जाने की बात कही, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 33% था। महिलाओं के फोन को होने वाला नुकसान घरेलू परिस्थितियों से अधिक जुड़ा हुआ पाया गया। बच्चों या पालतू जानवरों से संबंधित घटनाएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तीन गुना अधिक हुईं। वहीं, 26–30 वर्ष की आयु के उपभोक्ताओं को भारत का सबसे अधिक कनेक्टेड वर्ग माना गया। यह वर्ग संचार, डिजिटल भुगतान, खरीदारी और मनोरंजन के लिए स्मार्टफोन पर सबसे अधिक निर्भर पाया गया।

नए स्मार्टफोन की खरीद से आगे बढ़ते हुए, यह शोध भारत में तेजी से विकसित हो रहे रीफर्बिश्ड और प्री-ओन्ड (पहले से इस्तेमाल किए गए) स्मार्टफोन बाजार के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे उपभोक्ता पुराने डिवाइस को अपने पास बनाए रखने, एक्सचेंज करने या पहले से इस्तेमाल किए गए डिवाइस खरीदने की ओर बढ़ रहे हैं और डिवाइस के इस्तेमाल की अवधि भी लंबी होती जा रही है, वैसे-वैसे वारंटी और सुरक्षा योजनाएं पूरे स्मार्टफोन लाइफसाइकल में भरोसा और विश्वास कायम करने के लिए अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही आंकड़े स्पष्ट हैं: 70% उपभोक्ताओं का मानना है कि नए डिवाइस की तुलना में प्री-ओन्ड डिवाइस के लिए प्रोटेक्शन प्लान अधिक महत्वपूर्ण हैं। वहीं, 30% उपभोक्ताओं का कहना है कि वारंटी या प्रोटेक्शन प्लान की उपलब्धता उन्हें प्री-ओन्ड डिवाइस खरीदने के लिए प्रेरित कर सकती है। यह रीफर्बिश्ड बाजार के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।

इन निष्कर्षों से स्मार्टफोन ब्रांड्स, रिटेलर्स, वित्तीय संस्थानों और प्रोटेक्शन सर्विस प्रदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आता है। वे सरल, अधिक पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध सुरक्षा समाधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं की जागरूकता और उनके वास्तविक इस्तेमाल के बीच के अंतर को कम कर सकते हैं।

द ग्रेट इंडियन स्मार्टफोन प्रोटेक्शन क्राइसिस से सामने आए निष्कर्ष भारत के उपभोक्ता प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं। भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, डिवाइस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और स्मार्टफोन के इस्तेमाल की अवधि तीन साल से भी अधिक हो रही है। ऐसे में डिवाइस की कीमत और उसके लिए सुरक्षा अपनाने के बीच बढ़ता अंतर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पहले से कहीं अधिक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया रिपोर्ट में स्मार्टफोन ब्रांड्स, रिटेलर्स, बीमा कंपनियों और प्रोटेक्शन सर्विस प्रदाताओं से मिलकर किफायती सुरक्षा, क्लेम प्रक्रिया की जटिलता और उपभोक्ताओं के भरोसे जैसी चुनौतियों का समाधान करने की अपील की गई है। साथ ही, सुरक्षा को केवल बिक्री के समय पेश किए जाने वाले एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि स्मार्टफोन के पूरे स्वामित्व अनुभव का अभिन्न हिस्सा मानने की जरूरत पर जोर दिया गया है।