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जीएमसीएच-32 का चंडीगढ़ मॉडल बुजुर्गों में बढ़ा रहा डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता….

चंडीगढ़, 18 अगस्त। जीएमसीएच-32 के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नई दिल्ली के सहयोग से संचालित अंतर-पीढ़ी डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता पहल को उत्तर भारत में विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। इस पहल के तहत किशोरों को डिजिटल मेंटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे बुजुर्गों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने में मदद कर सकें।

डॉ. सोनिया पुरी, विभागाध्यक्ष, कम्युनिटी मेडिसिन के नेतृत्व में विकसित ‘चंडीगढ़ मॉडल’ के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को आभा आईडी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सेवाओं और ई-संजीवनी टेली-कंसल्टेशन जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मंगलवार को जीएमसीएच-32 में आईसीएमआर द्वारा वित्त पोषित क्षेत्रीय प्रसार कार्यशाला ‘फ्रॉम एविडेंस टू एक्शन: स्केलिंग द चंडीगढ़ मॉडल ऑफ इंटरजेनरेशनल डिजिटल हेल्थ लिटरेसी फॉर हेल्दी एजिंग’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला में परियोजना के निष्कर्षों के साथ विशेषज्ञों के व्याख्यान और चंडीगढ़ मॉडल के क्रियान्वयन, स्थायित्व तथा विस्तार पर दो पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।

कार्यक्रम में जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. रवनीत कौर, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विशाल गगलानी, सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक नवीन रट्टू, डॉ. सोनिया पुरी और प्रो. डॉ. दिनेश वालिया सहित विभिन्न विशेषज्ञ एवं हितधारक मौजूद रहे। डॉ. जुगल किशोर और डॉ. सुनीला गर्ग ने ऑनलाइन व्याख्यान दिए।

कार्यशाला में स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी व शिक्षक, एनजीओ, रोटरी क्लब, सेवानिवृत्त बैंकर्स एसोसिएशन, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चंडीगढ़ साइबर क्राइम शाखा के अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।

डॉ. सोनिया पुरी ने कहा कि यह पहल तकनीक और अंतर-पीढ़ी सहयोग को जोड़ते हुए बुजुर्गों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाती है। साथ ही युवाओं में संवेदनशीलता, संवाद कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है।

कार्यक्रम के दौरान डिजिटल लिटरेसी वेबसाइट, प्रोजेक्ट फिल्म और डिजिटल लिटरेसी टूलकिट का भी अनावरण किया गया। प्रो. रवनीत कौर और डॉ. सोनिया पुरी ने इन्हें जारी किया। विशेषज्ञों ने चंडीगढ़ के इस सामुदायिक मॉडल को उत्तर भारत में स्वस्थ वृद्धावस्था और डिजिटल समावेशन के लिए एक दोहराए जा सकने वाले मॉडल के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।

चंडीगढ़ मॉडल का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को तकनीक का इस्तेमाल सिखाना नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच संवाद मजबूत करना, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना और समुदाय आधारित स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देना है।