पंचकूला नगर निगम में लोकतंत्र का गला घोंट रही भाजपा, लगातार दूसरी बार सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव न कराना जनादेश का अपमान : मनोज अग्रवाल…..
इंडियन नेशनल लोकदल के पंचकूला जिलाध्यक्ष शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने पंचकूला नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव अब तक नहीं कराए जाने पर भाजपा सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव का परिणाम आए आज दो महीने हो चुके हैं और नवनिर्वाचित मेयर तथा पार्षदों का शपथग्रहण हुए भी डेढ महीना बीत चुका है, लेकिन आज तक सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की कोई तिथि तक घोषित नहीं की गई। इससे पहले भी पूर्व नगर निगम का पूरा पांच वर्षीय कार्यकाल भी बिना सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के ही समाप्त हो गया था। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि भाजपा की लोकतंत्र विरोधी कार्यशैली का प्रमाण है। उल्लेखनीय है कि मेयर चुनाव 10 मई को, परिणाम 13 मई को तथा शपथग्रहण 28 मई को हो चुका है। मनोज अग्रवाल ने कहा कि भाजपा को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्रीकरण पर विश्वास है। नगर निगम को सामूहिक नेतृत्व से चलाने की बजाय एक व्यक्ति और कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित करने की कोशिश की जा रही है। निर्वाचित पार्षदों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है और स्थानीय स्वशासन की भावना को कुचला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद केवल कानून की किताबों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, तो भाजपा सरकार जनता को सच बताए और इन पदों को समाप्त करने का कानून लेकर आए। लेकिन यदि ये पद कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो इन पर चुनाव कराने से भागना संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के जनादेश—तीनों का अपमान है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि पंचकूला की जनता ने नगर निगम इसलिए नहीं चुना कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए। भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में ऐसी कौन-सी मजबूरी है, जिसके कारण लगातार दूसरी बार इन पदों को खाली रखा जा रहा है?क्या भाजपा को अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं है, या फिर अंदरूनी गुटबाजी के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बंधक बना दिया गया है?
उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की तिथि घोषित करे। यदि जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को टाला जाता रहा, तो इनेलो इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाती रहेगी।


