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कॉन्क्लेव क्योंकर’ ने नशामुक्ति और पुनर्वास को दिया नया आयाम, नशामुक्ति योद्धाओं और उनके परिवारों का हुआ सम्मान……

चंडीगढ़ 27 जून 2026 नशामुक्ति, पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कॉन्क्लेव क्योंकर का सफल आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव की परिकल्पना और संचालन डॉ. (सुश्री) कमल एस. सक्सेना, मेंटर, कॉज़कनेक्ट ग्लोबल द्वारा किया गया।

इस अनूठे आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पहली बार नशामुक्ति, पुनर्वास और नशामुक्ति योद्धाओं के सामाजिक पुनर्समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, समाजसेवी और नशामुक्ति योद्धा एक ही मंच पर एकत्र हुए।

कॉन्क्लेव में पुनर्वास विशेषज्ञ, कानून प्रवर्तन अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, फिल्म निर्माता, विश्व युवा केंद्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, लायंस इंटरनेशनल के सदस्य, शोधकर्ता, शिक्षाविद, अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ नागरिक, सड़क पर रहने वाले बच्चों के साथ कार्य करने वाले मीडिया कार्यकर्ता, आध्यात्मिक गुरु तथा बड़ी संख्या में नशामुक्ति योद्धाओं ने भाग लेकर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण नशामुक्ति योद्धाओं का सम्मान समारोह रहा। पहली बार उनके परिवारजनों को भी उनके धैर्य, सहयोग और सफल पुनर्वास यात्रा में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि नशे से मुक्ति की लड़ाई केवल व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर “सवेरा” का भी पहली बार प्रदर्शन किया गया। यह एक श्रव्य-दृश्य शिक्षण सामग्री है, जिसकी परिकल्पना और निर्माण डॉ. कमल एस. सक्सेना ने किया है। इसे देशभर के पुनर्वास केंद्रों में एक प्रभावी शिक्षण सामग्री के रूप में उपयोग किया जाएगा, ताकि नशामुक्ति और पुनर्वास की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण “कर मैदान फ़तेह” प्रेरक गीत का प्रथम सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण रहा। डॉ. कमल एस. सक्सेना द्वारा लिखे गए इस प्रेरणादायक गीत ने उपस्थित लोगों में साहस, आत्मविश्वास, संकल्प और नशे पर विजय का संदेश जगाया।

प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा मंच नहीं देखा, जहां समाज के इतने विविध क्षेत्रों से जुड़े लोग एक ही उद्देश्य नशामुक्ति, पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन के लिए एक साथ आए हों। उन्होंने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।

कॉन्क्लेव के दौरान सार्थक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने “नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत” के साझा संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।

कॉन्क्लेव क्योंकर केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसे जनआंदोलन की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य नशामुक्ति योद्धाओं को सम्मान, समाज में स्वीकार्यता और एक नई सकारात्मक पहचान दिलाना है। यह पहल नशामुक्ति और पुनर्वास के क्षेत्र में सामाजिक सोच बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।