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गर्मी में रहना है स्वस्थ तो पिएं मटके का पानी, गैस, गले की समस्या से नहीं होंगे परेशान….

आज भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन, चण्डीगढ़ के संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अनूप सरीन जी द्वारा लक्ष्मी नारायण मन्दिर, सैक्टर 44, चण्डीगढ़ में मिट्टी के मटके प्रदान किए गए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में यशकीर्ति कर्याकर्ता का अमूल्य योगदान रहा। मिट्टी के घड़े या मटके का पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, खासकर गर्मियों में। यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और शुद्ध होता है। मिट्टी के मटके न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि बनाने वाले कुम्हार की आजीविका का मुख्य साधन है।

गर्मी के मौसम में मेट्रो सिटी में रहने वाले लोग फ्रिज का ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं, लेकिन आज भी कई शहरों में लोग मटके में रखा हुआ पानी पीना पसंद करते हैं क्योंकि मिट्टी के बर्तन में रखा हुआ पानी ताज़ा और ठंडा होने के अलावा बेहद फायदेमंद भी माना जाता है। मटके में रखे हुए पानी को पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। मिट्टी के बर्तन यानी घड़े या बोतल में रखे पानी को पीने से शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम में प्राकृतिक तरीके से सुधार होता है। इनमें रखे पानी का तापमान लेवल भी शरीर के लिए परफेक्ट होता है। यह हाइड्रेट सही तरीके से करता है, कूलिंग इफेक्ट देता है। फ्रिज का ठंडा पानी पीने से गले में समस्या हो सकती है, मटके का पानी पीने से ऐसा कुछ नहीं होता। मटके का पानी फ्रिज की तरह ठंडा नहीं होता, ऐसे में इसे सर्दी-जुकाम में भी पीने से गले को नुकसान नहीं होता। गर्मी के मौसम में अक्सर लोगों को सन स्ट्रोक की समस्या हो जाती है। यदि आप मिट्टी के बर्तन में रखा हुआ पानी पीते हैं तो इससे सन स्ट्रोक से बचाव हो सकता है। घड़े में रखे पानी में विटामिंस और मिनरल्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर के ग्लूकोज लेवल को मेंटेन रखने में मदद मिलती है। साथ ही शरीर को अंदर से ठंडा बनाए रखता है। इसमें किसी भी तरह के टॉक्सिक केमिकल्स नहीं होते हैं. ऐसे में घड़े में रखा हुआ पानी पीने से आप टॉक्सिक केमिकल्स से होने वाले नुकसान से बचे रहते हैं। सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। गैस, अपच, गैस्ट्रिक से संबंधित समस्या से परेशान रहते हैं तो आप घड़े का पानी जरूर पिएं। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी पीने से पेट की सेहत दुरुस्त बनी रहती है। एक अध्ययन के अनुसार, मिट्टी के घड़े में रखा पानी 4 घंटे बाद अपने आप फिल्टर हो जाता है, इसलिए इसे आरओ-यूवी फ़िल्टर की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती. मिट्टी के घड़े में रखा पानी प्रकृति रूप से क्षारीय होता है। एल्कलाइन मिट्टी पानी की अम्लता के साथ संपर्क करती है और पानी के उचित पीएच संतुलन को बनाए रखती है और गैस, एसिडिटी, जठरांत्र संबंधी दर्द को ठीक करने में मदद करती है। मिट्टी की यह प्रकृति आपकी सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचा सकती है।

बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मन्दिर में रामायण पाठ किया गया और भोग के उपरान्त भण्डारे की सेवा की गई। लक्ष्मी नारायण मंदिर धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्ट, सैक्टर 44, चण्डीगढ़ और जय जय चैरिटेबल ट्रस्ट, सैक्टर 44 सी, चण्डीगढ़ के ट्रस्टी,

सनंदन कुमार,अध्यक्ष और ट्रस्टी

वी एन शर्मा ट्रस्टी; कुलभूषण बिंदल ट्रस्टी; उर्वशी जुनेजा ट्रस्टी ,और विनोद गोयल; रमेश जुनेज, भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन, चण्डीगढ़ से संजीव सिंगला; नरेश गोयल; अनिल; सुनीता; पुष्पा; विद्या सचदेवा; रामबहादुर; वी पी गोयल; शीशपाल चौहान; आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।