मनीमाजरा पॉकेट-6 में ज़मीन के आंकड़ों पर बड़ा प्रशासनिक भ्रम….
मनीमाजरा के पॉकेट नंबर-6 की भूमि को लेकर स्थिति अब और अधिक गंभीर होती जा रही है। नगर निगम चंडीगढ़ और अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट, चंडीगढ़ प्रशासन—दोनों के आधिकारिक दस्तावेज़ों में भूमि के क्षेत्रफल को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिससे पूरे ज़ोनिंग प्लान और प्रस्तावित नीलामी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नगर निगम की 355वीं जनरल हाउस मीटिंग एवं अर्बन प्लानिंग विभाग के नक्शों में पॉकेट नंबर-6 का कुल क्षेत्रफल 33.55 एकड़ दर्शाया गया है, जबकि नगर निगम द्वारा मेरे प्रश्नों के लिखित उत्तर में इसी पॉकेट की कुल अधिग्रहीत भूमि मात्र 29.75 एकड़ बताई गई है।
स्थिति यहीं नहीं रुकती।
डिपार्टमेंट ऑफ अर्बन प्लानिंग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तैयार ज़ोनिंग/लेआउट ड्रॉइंग नंबर-104 (जॉब नंबर-77, दिनांक 24.03.2025) में भी पॉकेट नंबर-6 का क्षेत्रफल 33.55 एकड़ ही दर्शाया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आखिर सही और प्रमाणिक रिकॉर्ड किस विभाग के पास है।
कब्रिस्तान और संत निरंकारी सत्संग भवन को लेकर गंभीर विरोधाभास
अर्बन प्लानिंग, चंडीगढ़ प्रशासन के दस्तावेज़ों के अनुसार:
संत निरंकारी सत्संग भवन: 7.82 एकड़
कब्रिस्तान (Graveyard): 3.12 एकड़
वहीं नगर निगम द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में:
संत निरंकारी सत्संग भवन: 6.3 एकड़
कब्रिस्तान (अन-अधिग्रहीत): 2.47 एकड़
यानी एक ही भूमि के लिए दो सरकारी विभागों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रफल दर्शाया जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, समिति की बैठक में पब्लिक यूटिलिटी (स्कूल, संत निरंकारी भवन, कब्रिस्तान, SCF आदि) के लिए कुल 12 एकड़ भूमि दिखाई गई है, जबकि उपलब्ध व्यक्तिगत ब्रेक-अप को जोड़ने पर भी आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते।
गंभीर सवाल
1. पॉकेट नंबर-6 की कुल भूमि 29.75 एकड़ है या 33.55 एकड़—आखिर सही आंकड़ा कौन-सा है?
2. डिपार्टमेंट ऑफ अर्बन प्लानिंग, चंडीगढ़ प्रशासन के आंकड़े सही माने जाएँ या नगर निगम के अधिकारियों के?
3. संत निरंकारी सत्संग भवन और कब्रिस्तान का क्षेत्रफल अलग-अलग दस्तावेज़ों में अलग क्यों दर्शाया गया है?
4. बिना स्पष्ट, प्रमाणिक और एकसमान रिकॉर्ड के आवासीय प्लॉटों की नीलामी किस आधार पर की जा रही है?
मांग
नगर निगम चंडीगढ़ और चंडीगढ़ प्रशासन से मांग की जाती है कि:
पॉकेट नंबर-6 की अंतिम, प्रमाणित और स्पष्ट भूमि स्थिति सार्वजनिक की जाए
अर्बन प्लानिंग और नगर निगम के आंकड़ों में मौजूद विरोधाभास को लिखित रूप में स्पष्ट किया जाए
जब तक भूमि का सही क्षेत्रफल, अधिग्रहण स्थिति और ज़ोनिंग का आधार पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, नीलामी और आगे की सभी योजना प्रक्रियाएँ तत्काल रोकी जाएँ
यह मामला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक हित और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।
जसबीर सिंह बंटी
सीनियर डिप्टी मेयर
चंडीगढ़


