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सेक्टर 22 बी में महाकाली का 30वां विशाल भंडारा और भजन संध्या धूमधाम से आयोजित….

चंडीगढ़( ):-समाजसेवा और लोक कल्याण की भावना से प्रेरित होकर, सेक्टर 22 बी में महाकाली का 30वां विशाल भंडारा और भजन संध्या धूमधाम से आयोजित की गई। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व प्रख्यात समाजसेवी विनोद शाही ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत माता महाकाली की विधिवत पूजा-अर्चना और अनुष्ठान से हुई। जिसके उपरांत माता की जोत प्रज्वलित की गई। इस दौरान लाडले बेरी वाले-चंडीगढ़ की भजन मंडली ने माता के भजनों से पंडाल में उपस्थित भक्तों को झूमने पर मजबूर किया। भक्तजन भजनों पर मतवाले होकर जमकर नाचे।

इस अवसर पर अशोक शाही, विवेक शाही, दिव्या शाही, भद्र शाही, आनंद स्याल और अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।

आयोजक विनोद शाही ने इस अवसर पर बताया कि उनके प्रेरणास्रोत स्वर्गीय समाजसेवी श्यामलाल शाही और माता राजवती ने समाजसेवा को अपना जीवन समर्पित किया। उन्हीं की प्रेरणा से यह वार्षिक आयोजन किया जाता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए किए गए प्रयासों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।

आयोजन का समापन विशाल भंडारे के साथ हुआ, जिसमें अशोक शाही, विवेक शाही, दिव्या शाही, भद्र शाही और स्थानीय निवासियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं को भोजन, मिठाई, और फल वितरित किए गए। इस आयोजन ने सामुदायिक एकता और भक्ति की भावना को प्रबल किया।

लोक कल्याण के लिए महाकाली का भंडारा एक धार्मिक आयोजन है जिसमें महाकाली की पूजा के साथ भक्तों को नि:शुल्क भोजन (प्रसाद) कराया जाता है, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और सामाजिक सौहार्द बढ़ता है। यहाँ श्रद्धालु माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और जनसेवा के भाव से जुड़ते हैं।

धार्मिक महत्व: यह आयोजन देवी महाकाली (कालिका) के प्रति आस्था व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद पाने का एक माध्यम है, जो शक्ति और परिवर्तन की देवी मानी जाती हैं।

लोक कल्याण का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जनसेवा, आपसी भाईचारे और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देना है।

भोजन और प्रसाद: भंडारे में आने वाले सभी भक्तों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है, जिसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

आयोजन: ये भंडारे कई बार जागरण, माता की चौकी और विशेष पूजा के साथ आयोजित किए जाते हैं, जैसे नवरात्रों के दौरान या मंदिरों की वर्षगाँठ पर।

आध्यात्मिक लाभ: ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों में परोपकार की भावना बढ़ती है।