श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला, सांसद व महासचिव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का बयान….
मोदी सरकार की ‘बदले और नफरत की राजनीति’ 16 दिसंबर, 2025 को ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो गई, जब स्पेशल जज, MP/MLA केस, नई दिल्ली ने श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी के खिलाफ ED के केस को सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही भाजपा के हाथों की कठपुतली बनी ED की अंधे इंतक़ाम की कार्रवाई को करारा जवाब मिला है।
कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन, श्रीमती सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता, श्री राहुल गांधी को जान-बूझकर टारगेट करने वाला राजनीति से प्रेरित केस कभी भी कानून से जुड़ा नहीं था, बल्कि यह अंधी बदले की भावना से प्रेरित था। पिछले 11 सालों में कांग्रेस पार्टी के अपनी कई नाकामियों को लगातार सामने लाने से परेशान भाजपा सरकार ने एक के बाद एक जांच एजेंसियों को राजनीतिक डराने-धमकाने के लिए हथियार बनाना शुरू कर दिया।
● स्पेशल कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मामले में अपने ही पहले के रुख से मनमाने ढंग से पलटने के बाद 2021 में मनी-लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) पर साफ तौर पर सवाल उठाए और उसे कड़ी फटकार लगाई।
● जुलाई 2014 में, ED ने खुद CBI को लिखा, जिसमें नेशनल हेराल्ड मामले से जुड़ी डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत को सिर्फ आगे बढ़ाया गया। CBI ने 2014 में अधिकार क्षेत्र की साफ सीमाओं का हवाला देते हुए FIR दर्ज करने से मना कर दिया।
● 2015 में, डॉ. स्वामी ने एक बार फिर एक प्राइवेट शिकायत दर्ज की। जांच के बाद, CBI ने उन्हीं अधिकार क्षेत्र की बाधाओं के कारण FIR दर्ज न करने का अपना फैसला दोहराया।
● कोर्ट ने दर्ज किया है कि कानूनी राय के आधार पर, ED ने भी जानबूझकर 2014-15 के दौरान कोई मनी-लॉन्ड्रिंग जांच शुरू नहीं की।
● कोर्ट ने विशेषतः तथ्यात्मक निर्णय दिया कि श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी की शिकायत के बावजूद साल 2014 से साल 2021, यानी 7 साल तक CBI और ED ने श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया, क्योंकि दोनों ही, CBI और ED ने अपनी फाइलों में दर्ज किया कि कोई आपराधिक मुकदमा बनता ही नहीं।
● कोर्ट ने यह भी निर्णय दिया कि CBI ने तो साल 2014 में डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत के बावजूद आज तक, यानी साल 2025 तक – 12 साल से कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। कोर्ट इस नतीजे पर भी पहुंचा कि श्रीमती सोनिया गांधी व श्री राहुल गांधी के खिलाफ कोई FIR दर्ज ना होने के बावजूद ED ने 30 जून, 2021 को मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज कर लिया, जो कानूनन हो ही नहीं सकता।
● कोर्ट ने तो यह भी निर्णय दिया कि श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ऐसी कोई शिकायत दर्ज करवाने के लिए अधिकृत ही नहीं थे।
● माननीय कोर्ट ने शिकायत पर संज्ञान लेने से भी इनकार कर दिया और यह कहा कि यह पूरी तरह से आधारहीन है।
नेशनल हेराल्ड मामले का सच क्या है – तथ्य व सत्य जानें:
सत्यः
1. अंग्रेजी हुकूमत को जड़ से उखाड़ने के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने साल 1937 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार निकाला। इसका हिंदी एडिशन था, ‘नवजीवन’ व उर्दू एडिशन था, ‘कौमी आवाज’। अंग्रेजों को इस अखबार से इतना खतरा महसूस हुआ कि उन्होंने साल 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान नेशनल हेराल्ड पर प्रतिबंध लगा दिया, जो साल 1945 तक चला। इस अखबार की मालिक कंपनी एसोशिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) है, जिसका गठन साल 1937-38 में किया गया था और आज तक यही कंपनी इस अखबार को चलाती है।
AJL कंपनी अपने शेयर होल्डर्स सहित किसी को भी न तो डिवीडेंड दे सकती है, न ही प्रॉफिट दे सकती है और केवल ‘‘जन हित’’ के लिए ही चलाई जा सकती है।
2. एसोशिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के पास लखनऊ में केवल एक संपत्ति है। इसके पास पाँच शहरों – दिल्ली, पंचकुला, मुंबई, पटना व इंदौर में लीज़ पर अचल संपत्तियाँ हैं। ऐसे में, 5,000 करोड़ की संपत्ति होने का इल्ज़ाम अपने आप में झूठ है।
3. नेशनल हेराल्ड अखबार कई सालों से अपने कर्मचारियों की तनख्वाह, वीआरएसए मुनिसिपल कॉर्पोरेशन को दिए जाने वाले टैक्स तथा दूसरी कानूनी देनदारी का भुगतान नहीं कर पाया। कांग्रेस पार्टी ने अपनी जिम्मेवारी मानते हुए लगभग 100 किश्तों में कुल ₹90 करोड़ की इन देनदारियों का भुगतान किया।
4. कांग्रेस पार्टी द्वारा दिया गया यह ₹90 करोड़ का कर्ज AJL व नेशनल हेराल्ड वापस नहीं कर पाए, इसलिए वकीलों की राय के अनुसार, एक ‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ कंपनी, ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ का गठन किया गया, जिसमें श्रीमती सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी, श्री सैम पित्रोदा, श्री मोती लाल वोहरा, श्री ऑस्कर फर्नांडिस व श्री सुमन दुबे डायरेक्टर व शेयर होल्डर बने। इस कंपनी ने कांग्रेस पार्टी से ₹90 करोड़ का कर्ज अपने नाम ले लिया। नेशनल हेराल्ड अखबार यह कर्ज वापस नहीं दे सका, इसलिए उसने इस कर्ज के एवज में एसोशिएटेड जर्नल लिमिटेड के शेयर यंग इंडियन लिमिटेड कंपनी को दे दिए।
5. यहाँ पर गौर करने वाली बात यह है कि ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ एक ‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ कंपनी है, यानी इसके शेयर होल्डर या डायरेक्टर न तो तनख्वाह ले सकते हैं और न ही डिवीडेंड या प्रॉफिट ले सकते हैं। इसके शेयर होल्डर किसी दूसरी ‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ कंपनी के अलावा अन्य किसी को भी इसके शेयर भी नहीं बेच सकते हैं।
इसी तरह, AJL भी अपने किसी भी शेयर होल्डर या डायरेक्टर को न तो डिवीडेंड दे सकती है और न ही प्रॉफिट।
6. साल 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने AJL को ₹90 करोड़ के कर्ज के बारे भारत के चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की। नवंबर, 2012 में चुनाव आयोग ने श्री सुब्रमण्यम स्वामी की यह शिकायत खारिज कर दी व निर्णय दिया कि रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के सेक्शन 29 (B) व 29 (C) में साफ है कि, “provide for the manner in which political parties… may raise their funds… but there is no provision whatsoever in that Act prescribing the manner in which the political parties may use those funds” (emphasis added).”
7. मई, 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली। उस समय ED द्वारा श्री सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर तफ्तीश की जा रही थी। ED की तफ्तीश में यह शिकायत बेबुनियाद पाई गई, इसलिए इसे अगस्त, 2015 में बंद कर दिया गया। इसके बाद मोदी सरकार द्वारा ED के डायरेक्टर, राजन कटोच को हटाकर सितंबर, 2015 में यह जाँच दोबारा शुरू कराई गई।
इसी मामले में 30 जून, 2021 को ED द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की ECIR दर्ज की गई, जिसमें श्रीमती सोनिया गांधी व श्री राहुल गांधी को आरोपी बनाया गया। अदालत में 16 दिसंबर, 2025 के अपने फैसले से इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
सच की जीत हुई है। सच की हमेशा जीत होगी।
सत्यमेव जयते!


