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ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिर बाबा श्री पीर रतननाथ जी के परिसर में तोड़फोड़ के विरोध की मुहिम चण्डीगढ़ पहुंची : कार्यवाई के विरोध स्वरूप राम नाम का जाप किया….

चण्डीगढ़ : दिल्ली के झंडेवालान स्थित करीब 1400 साल पुराने ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिर बाबा श्री पीर रतननाथ जी के परिसर में गत 29 नवंबर को हुई डीडीए और एमसीडी द्वारा की गई तोड़फोड़ की संयुक्त कार्रवाई को लेकर देश-विदेश में बसे हुए बाबा श्री रतननाथ जी के अनुयायियों में भारी रोष व्याप्त है तथा वे भारत के अलावा विदेशों में भी हर शहर में शांतिपूर्ण ढंग से पदयात्रा करके रोष मार्च निकाल रहे हैं। बड़ी बात ये है कि इन रोष मार्च में सभी धर्मों व समुदायों से जुड़े लोग बढ़चढ़ कर शामिल हो रहे हैं।

इसी सिलसिले में चण्डीगढ़ में भी बाबा श्री रतन नाथ जी के अनुयायियों ने भी आज शांतिपूर्वक अपना रोष व्यक्त किया। चण्डीगढ़ में हर श्री नाथ जी मंदिर गाँव किशनगढ़ मे स्थित है, जिसके साथ ट्राइसिटी के हज़ारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।

हर श्री नाथ जी मंदिर, चण्डीगढ़ के प्रधान सुरेंद्र कुमार चोपड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि देश की राजधानी में झंडेवालान में स्थित हर श्री नाथ जी मंदिर पिछले 80 वर्षों से अस्तित्व में है और इसकी परंपरा लगभग 1400 वर्षों की प्राचीन गोरखनाथ परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। उनका कहना है कि झंडेवालान में बुलडोजर से ध्वस्तीकरण के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था कम नहीं हुई।

सुरेंद्र कुमार चोपड़ा ने बताया कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी नाथ परम्परा से ही हैं व वे स्वयं मंदिर बाबा श्री पीर रतननाथ जी की गद्दी के बारे में में अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि गोरक्षनाथ जी नाथ परम्परा के पहले संत थे व उनके बाद बाबा श्री पीर रतननाथ जी उनकी परम्परा के वाहक हुए।

उन्होंने कहा कि ये अजीब विडंबना है कि पाकिस्तान में इतने बरसों बाद भी मंदिर मजबूती से कायम है व वहां भक्तों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है, जबकि अपने देश भारत में सरकार मंदिर परिसर को सरंक्षण प्रदान करने में नाकाम साबित हुई।

भक्तों के मुताबिक झंडेवालान में कार्रवाई के दौरान तुलसी वाटिका, लंगर स्थल और कुछ निर्माणों को तोड़ा गया, जिससे श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी है। सेवकों का कहना है कि स्थल पर 16 वर्षों से अखंड राम नाम की ज्योति, हरे राम पाठ, दैनिक पूजन और लंगर सेवा निरंतर चल रही थी व आगे भी चलती रहेगी। मंदिर में प्रतिदिन प्रातः आरती, सत्संग और राम नाम का जाप चलता है। हजारों श्रद्धालु दर्शन करते हैं। मंदिर प्रबंधन द्वारा लंगर, जल सेवा, गरीबों को कंबल वितरण, मेडिकल शिविर और गौशाला संचालन जैसी सेवाएँ वर्षों से चलाई जा रहीं हैं। तोड़े गए स्थल में रोजाना हजारों लोगों के लिए लंगर प्रसाद बनता था जोकि सेवा, भक्ति और समुदाय की पहचान थी। इसे तोड़ने से भक्तों की आस्था पर चोट पहुंची है।

प्राचीन इतिहास पौराणिक परंपरा के अनुसार यह स्थान लगभग 1400 वर्ष पुराना माना जाता है। यहाँ पूज्य श्री श्री 1008 बाबा पीर रतननाथ जी महाराज, जो आदि गुरु गोरखनाथ जी के परम शिष्य माने जाते हैं, की परंपरा स्थापित है। वर्तमान में इस परंपरा की 31वीं पीठ श्री श्री 1008 बाबा लक्ष्मण दास स्वामी जी महाराज गद्दी पर विराजमान हैं।

इस नाथ परंपरा के 1.25 करोड़ अनुयायी देश-विदेश के लगभग 50 स्थानों पर सक्रिय हैं, जिनमें जर्मनी, लंदन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं।

सभी सेवादारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग की है कि प्रति वर्ष शिवरात्रि के पर्व पर यहाँ विशाल मेला जुड़ता है और इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो जाती हैं, क्योंकि शिवरात्रि के मेले में यहाँ लाखों सेवादार देश-विदेश से दिल्ली में आते हैं और यहां रुकते हैं। इसलिए ये जगह जल्द से जल्द वापस की जाए ताकि शिवरात्रि का मेला ठीक ढंग से मनाया जा सके।

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