आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज 01.12.2023
चंडीगढ़ दिगंबर जैन समाज का सौभाग्य होने से परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से भव्य अतिभव्य श्रीमद् पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आज पांचवा दिन ज्ञान कल्याणक महा महोत्सव, इस दिन भगवान को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति होती है अर्थात संसार मार्ग को त्याग कर तप दीक्षा अंगीकार कर भगवान महाराज जंगल की तरफ बिहार कर देते और समस्त जगत से उदासीन होकर अपनी आत्मा में तल्लीन होते मौन साधना के साथ तप ध्यान में लवलीन होते हैं l इस तपस्या का ही फल है जो महाराज आदिनाथ सागर को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति होती है कैवल्य ज्ञान होने पर ही भगवान का समोशरण लगता है उसमें सभी जीवो के कल्याण एवं हित के लिए भगवान की दिव्य देशना खिरती है जिसमें तिर्यच गति के समस्त जीवों का तथा देव गति के देवों का और मनुष्य गति के लोगों को सात तत्व, नौ पदार्थ, छह द्रव, पांच अरिकाय, चार गति, आदि धर्मो का उपदेश दिया जिसमें श्रावक एवं मुनि धर्म दोनों का वर्णन किया जाता है l

ज्ञान की महिमा समस्त लोक में है l ज्ञानी की हर जगह पूजा होती है कोई अज्ञानी भी अगर ज्ञानी की संगति में आ जाता तो वह भी ज्ञानवान व पूज्यनीय बन जाता है आज के दिन विद्वान गोष्ठी का भी आयोजन किया गया l आचार्य भगवान गुणभद्र स्वामी जी द्वारा रचित आध्यात्मिक ग्रंथ आत्मानुशासन जिसमें आचार्य महाराज ने आत्मा के ऊपर कैसे संयम रखा जाए इसको बहुत ही सरल और सहज भाषा में समझाया l आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज ने इसी ग्रंथ पर बहुत ही सरल भाषा में अल्प ज्ञानी जीवो को समझमें आ जाए, ऐसा समझते हुए इस ग्रंथ पर आत्माहिता नाम की टीका लिखी जो कि हमारे ज्ञानावर्णी कर्म का क्षयोपशम करने में सहायक होगी आप और हम सभी भी इस ग्रंथ का पठन-पाठन कर अपनी अज्ञानता को दूर कर सकें l
आज भगवान को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई समोशरण की रचना हुई आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज की देशना भगवान के रूप में खिरी, दुख क्यों आते हैं उनके आने का कारण क्या है दुख आए बिना सुख की कीमत समझ में आती नहीं है कभी दुख कभी सुख इसी के बीच सारा जीवन निकल जाता है l अपने लिए कुछ करना है ऐसा विचार ही मन में नहीं आता है क्यों कहीं पुरुषार्थ नहीं करता तो कहीं चारित्र मोहनीय कर्म का उदय होता है आयु बीतती जा रही है समय कम है दीपक का तेल घटता जा रहा है l आयु घटती जा रही है हम इसको समझ नहीं पा रहे हैं इसी भूल के कारण संसार का भ्रमण हमारा चला आ रहा है पुरुषार्थ की प्रबलता तीव्र हो जाएगी तो तुम्हारा मार्ग खुल जाएगा l और पुरुषार्थ करने वाले को फल की प्राप्ति निश्चित होती है आज नहीं तो कल l
इंदौर से आए डॉक्टर मनोज कुमार मनुज इंदौर, से प्रोफेसर धर्मचंद जैन और कुरुक्षेत्र से, प्रोफेसर टीकमचंद दिल्ली से प्रोफेसर सनत कुमार जयपुर से, पंडित नेमीचंद्र जी विद्यार्थी आदि विद्वान बाहर से पधारे भगवान के ज्ञान कल्याणक महोत्सव पर अपनी अज्ञानता को दूर कर अपने ज्ञान की ज्योति बढ़ाए यही ज्ञान ज्योति हमारा कल्याण करने वाली है l यह जानकारी बाल ब्र. गुंजा दीदी एवं श्री धर्म बहादुर जैन जी ने दी


