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आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज 24.11.2023…

चंडीगढ़ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज ने स्वाध्याय सभा में समझाते हुए कहा कि संसार में किसी के साथ भी कोई अन्याय,पक्षपात, अनुचित, गलत कार्य नहीं होता है यह अकाट्य सत्य है l हमारे लिए ऐसा महसूस होता है कि सामने वाले दूसरे हमारे साथ अन्याय, पक्षपात ,अनुचित,गलत व्यवहार कर रहे हैं किंतु ऐसा नहीं है अभी हम सभी कुछ सही करते हैं तो भी हमारे साथ अन्याय आदि हो रहा है तब विचार करना चाहिए कि अभी हम सब कुछ सही कर रहे हैं फिर भी हमारे साथ अन्याय आदि हो रहा है तो इसका अर्थ है कि इस भव में नहीं किंतु पूर्व भव में जरूर किसी का सही होते हुए भी हमने उसके साथ अन्याय आदि किया होगा यह बात अवश्य ही है, अन्यथा ऐसा हो ही नहीं सकता l
उदाहरण के तौर पर देखो की सीता जी ने इस भव में क्या पाप किया, फिर भी उनके साथ जीवन भर न्याय आदि होता रहा l आदि ब्रह्म आदिनाथ प्रभु ने इस भव में कौन सा पाप किया, जिसके फल स्वरूप उन्हें 6 माह तक भूखा घूमना पड़ाl हनुमान जी की मां अंजना ने इस भव में क्या पाप किया जिसके कारण उसे अपने पति का 22 वर्ष तक मुख देखने को नहीं मिला

इन उदाहरण से अपने आप सिद्ध हो जाता है कि हम इस भव में कुछ गलत नहीं कर रहे हैं किंतु पूर्व भव में कुछ अवश्य गलत किया था l इसी कारण से इस भव में मेरे साथ गलत हो रहा है इस प्रकार देखा जाए तो हमारे साथ अन्याय आदि कहां हो रहा है l जो हो रहा है वह न्याय पूर्वक ही हो रहा है l संसार में सब कर्म के अनुसार होता है कभी भी अन्याय आदि नहीं होता, क्योंकि कर्म एक सच्चा न्याय कर्ता है ।अतः कर्म के फल में सामने वाले पर क्रोध आदि नहीं करना चाहिए किसी को दोष नहीं देना चाहिए एवं समता, संयम,शांति रखना चाहिए इसी में हमारा हित कल्याण है
संसार में सभी के साथ न्याय पूर्वक ही व्यवहार होता है l आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज के सानिध्य में होने जा रहे श्रीमद् पंचकल्याणक महा–महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ की तैयारियां चरम स्तर पर हैं आप सभी 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक होने जा रहे महामहोत्सव में पधारकर पूर्ण लाभ लें l यह पुण्य ही संसार के दुखों से निकालकर सुखों को देने वाला है l यह जानकारी बाल ब्र. गुंजा जैन जी एवं श्री धर्म बहादुर जैन जी ने दी