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किसान भवन बनाएंगे आलम जीत मान का ऐलान: राकेश टिकैत ने किया सम्मान…

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प्रसिद्ध समाजसेवी व स्टेट अवार्डी आलमजीत सिंह मान ने किसान आंदोलन मे शहीद हुए 600 किसानो ओर किसान जत्थेबंदियो के लिए अपने खर्चे पर बिना किसी बाहरी मदद के चंडीगढ़ प्रेस-क्लब मे किसान आंदोलन के अगुआ राकेश टिकैत की प्रेस-वार्ता मे किसान भवन बनवाने का ऐलान करते हुए उन्होने कहा कि वो भी पैदाइशी किसान हैं। इसलिए किसानों के दर्द ओर परेशानी को बखूबी समझते हैं ओर उनके संघर्ष मे उनके साथ हैं। इस समय पूरा देश किसानों के इस संघर्ष मे उनका साथ दे रहा है। वह भी अपनी नैतिक व सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी तरफ से किसान भाइयों के लिए कुछ करना चाहते है। और इसी के चलते उन्होंने “म्यूजिम सरीखा किसान भवन” बनवाने का फैसला किया है।

मान साहब ने खुलासा किया कि भवन मे शुरूआती गेट पे ही 9 फुट ऊँची किसान की मूर्ति लगेगी, ओर आंदोलन के दौरान किसान भाइयों द्वारा की गयी सारी गतिविधियों, धरने, प्रदर्शन व शहीद हुए किसानों की 3डी इमेज पिक्चर चलेगी ताकि आनेवाली नस्ले देख सके ओर समझ सके की अन्याय के खिलाफ कैसे मोर्चा खोला गया ओर जंग लड़ी गयी। इस भवन मे एक बड़ा हॉल होगा जिसमें गरीब किसान या मजदूर भाई अपना कोई फंक्शन कर सकेंगे। ओर इसमे करीब 25 से 30 कमरे होंगे, ये कमरे हर तरह की आधुनिक सुविधाओं से लैस होगें। काबिलेतारीफ है कि इस “किसान भवन” मे हर तरह की सुविधा किसानों को मुफ्त मुहैया करवाई जाएगी। उनसे एक भी पैसा बतौर फीस नहीं लिया जाएगा यही मेरी तरफ से किसानों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। साथ ही उन्होंने सरकार से निवेदन करते हुए कहा वह अपने कृषि कानून बिल को वापस ले, सरकार की जिदबाजी मासूम किसानों की जान ले रही है।

वैसे मान साब 39 जथेबदीयो से अलग अलग बात कर चुके हैँ ताकि सब मिल के साथ चल सके। प्रेस वार्ता मे राकेश टिकैत मंच से बोलते हुए मुक्त कंठ से आलमजीत सिंह मान की तारीफ़ करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया, ओर कहा कि जो भी योगदान आलम जीत मान किसान भाइयों के लिये कर रहे हैँ वो सराहनीय है। प्रेस क्लब मे ही पत्रकारों से बातचीत करते हुए आलम जीत मान ने कहा कि सबको पता है कि किसान अन्नदाता है, और हमें अपने अन्नदाता और धरतीपुत्र का सम्मान करना चाहिए। सरकार जिन्हे आतंकवादी और उग्रवादी बता रही है उन सिखों का इतिहास और वर्तमान दोनों ही सेवा भाव से भरपूर है। दुनिया के किसी भी हिस्से में मुसीबत आती है तो सबसे पहले सिख कौम आगे बढ़ती है। वैसे काबिलजिक्र है कि आलम जीत सिंह मान पिछले 32 सालों से समाज सेवा में लगे हैं। इन्होंने आज तक कभी किसी से एक नया पैसा नहीं लिया है। चाहे ब्लाइंड स्कूल के बच्चों की मदद हो या फिर कोरोना के दरम्यान लावारिस मुर्दों को मुर्दघाट ले जाने का खर्चा हो। आलम जीत मान ने पूरी तरह अपने खर्चे पर मुर्दों को श्मशान घाट तक पहुंचाया। आगे भी अपने सेवा भाव को सतत चालयमान रखेंगे।