उत्तम आर्जव धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने की आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण की ..भावना…….
श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के अंतर्गत तीसरे दिन आज उत्तम आर्जव धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं शांतिधारा के माध्यम से आत्मशुद्धि तथा आत्मकल्याण की भावना को अपनाने का संकल्प लिया।
आज के धार्मिक आयोजन में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य श्री करुण जैन एवं श्रीमती सौम्या जैन को प्राप्त हुआ।
प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री धर्म बहादुर जैन एवं श्रीमती मेम लता जैन को प्राप्त हुआ, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्री अमित जैन एवं श्रीमती प्रीति जैन को प्राप्त हुआ।
दशलक्षण विधान के दौरान सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य श्री पुष्पेंद्र जैन एवं श्रीमती पूजा जैन को प्राप्त हुआ।
उत्तम आर्जव धर्म का अर्थ मन, वचन और कर्म में सरलता, निष्कपटता एवं एकरूपता रखना है। जैन दर्शन के अनुसार व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में किसी प्रकार का छल-कपट न हो तथा जीवन में सरलता एवं सच्चाई का भाव बना रहे, यही उत्तम आर्जव धर्म की भावना है।
दशलक्षण पर्व के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। वातावरण भक्तिमय बना हुआ है और श्रद्धालु आत्मचिंतन, संयम एवं धर्माराधना के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सात्विक भोजन किया। आज का भोजन श्री अतुल जैन डेराबस्सी की और से आयोजित किया गया था।


