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दो पन्नों के टेबल एजेंडे से ₹227 करोड़ पास कर भाजपा ने नगर निगम को ‘रबर स्टैम्प’ बनाया, राज्यपाल से उच्चस्तरीय जांच की मांग…..

चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने नगर निगम की 31 जुलाई 2026 को हुई 363वीं जनरल हाउस बैठक में मात्र दो पन्नों के टेबल एजेंडे के माध्यम से ₹227 करोड़ के वित्तीय प्रस्ताव को पारित किए जाने को “₹227 करोड़ का टेबल एजेंडा घोटाला” करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता के विश्वास पर सीधा हमला है।

लक्की ने कहा, “भाजपा ने बहुमत के अहंकार में नगर निगम सदन को चर्चा का मंच नहीं, बल्कि अपनी मुहर लगाने वाली मशीन बना दिया है। करोड़ों रुपये के प्रस्ताव को बिना पर्याप्त जानकारी, बिना दस्तावेज़ और बिना बहस के पारित कराना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा की नीयत साफ थी तो ₹227 करोड़ का प्रस्ताव निर्धारित नियमों के अनुसार 72 घंटे पहले पार्षदों को क्यों नहीं दिया गया? आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये अंतिम समय में केवल दो पन्नों के एजेंडे के सहारे मंजूर करवाने पड़े?

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि Punjab Municipal Corporation Act, 1976 (जैसा कि चंडीगढ़ में लागू है) की धारा 57 के अनुसार बैठक का एजेंडा कम-से-कम 72 घंटे पहले उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। यदि कोई अतिरिक्त विषय लाना हो तो Regulation-12 के तहत सप्लीमेंट्री एजेंडा भी निर्धारित समय के भीतर दिया जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि इन प्रावधानों की अनदेखी कर पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में डाल दिया गया।

लक्की ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ₹227 करोड़ की परियोजना की तकनीकी जानकारी तक सदन से साझा नहीं की गई। किस पाइपलाइन पर काम होगा, पुरानी पाइपलाइन बदलेगी या नई डाली जाएगी, पाइप का आकार क्या होगा, तकनीकी आवश्यकता क्या है, लागत का आधार क्या है—इनमें से किसी प्रश्न का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। जब परियोजना का तकनीकी आधार ही स्पष्ट नहीं है तो इतनी जल्दबाज़ी आखिर क्यों?

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नगर निगम को जनसेवा का संस्थान नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का केंद्र बनाने में लगी हुई है। जनता के धन को बिना जवाबदेही और बिना पारदर्शिता के खर्च करने की अनुमति कांग्रेस कभी नहीं देगी।

एच.एस. लक्की ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक ₹227 करोड़ के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाई जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि परियोजना की Detailed Project Report (DPR), तकनीकी स्वीकृतियां, लागत का मदवार विवरण, टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय अनुमोदन और संबंधित सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।

लक्की ने कहा कि भविष्य में करोड़ों रुपये के किसी भी वित्तीय प्रस्ताव को टेबल एजेंडा के माध्यम से पारित करने पर रोक लगाई जानी चाहिए और सभी प्रस्ताव निर्धारित समय सीमा के भीतर पार्षदों को उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि उनकी तकनीकी एवं वित्तीय समीक्षा और लोकतांत्रिक चर्चा सुनिश्चित हो सके।

अंत में एच.एस. लक्की ने कहा, “नगर निगम भाजपा की निजी जागीर नहीं है। यह चंडीगढ़ की जनता की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। जनता के टैक्स के एक-एक रुपये का हिसाब भाजपा और नगर निगम प्रशासन को देना ही होगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं किए गए, तो चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस कथित ₹227 करोड़ के टेबल एजेंडा घोटाले को सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक पूरी ताकत के साथ उठाएगी। जनता के धन का हिसाब लेकर ही रहेगी।

जारीकर्ता:

चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी