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भगवान शिव एवं मां पार्वती के विवाह की मंगलमय कथा का वर्णन…..

चंडीगढ़ ( )पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीसत्यनारायण मंदिर परिसर सेक्टर 22 चंडीगढ़ में आयोजित शिवमहापुराण कथा के चतुर्थ दिवस में सद्भावना दूत पूराणाचार्य स्वामी डा रमनीक कृष्ण जी महाराज ने भगवान शिव एवं मां पार्वती के विवाह की मंगलमय कथा का वर्णन करते हुए कहा की पर्वत राज हिमालय और मेना की पुत्री माता पार्वती ने शिव को प्राप्त करने के लिए तपस्वियों की भांति कठोर तप किया माता पिता के मना करने पर भी दृढ़ संकल्प कर चुकी पार्वती ने किसी की बात ना मानी और शंकर को प्राप्त करने के लिए तप किया। कई वर्षों तक बिना कुछ खाए साधना करने के कारण शरीर तिनके के समान हो गया इसलिए मां भगवती अपर्णा कहलाई। सप्तऋषियों ने शिव की आज्ञा से देवी की परीक्षा ली विष्णु को गुणों की खान बनाया ओर कहा शिव तो श्मशानों के वासी हैं। परन्तु देवी ने कहा मेरे स्वामी शिव ही हैं। सप्तऋषियों ने प्रसन्न होकर वरदान दिया। भोले नाथ की बारात सजी। देवता, किन्नर, गंधर्व, नाग सभी भगवान की बारात में चले, मैना मैया शिव के स्वरूप को देखकर घबराई। मै अपनी कन्या को लेकर पर्वत से कूद जाऊंगी पर शिव के संग नहीं ब्याहुंगी। नारद जी ने सप्तऋषियों के साथ आकर सारे विषाद को समाप्त किया और पार्वती के पिछले जन्म की कथा सुनाई। मैना मैया प्रसन्न हुई। विवाह की वेदी सजी। ब्रह्मा जी ने लग्न पत्रिका पड़ी। शिव विवाह में सर्वप्रथम गणपति पूजन हुआ। इसमें कैसे आश्चर्य की बात है क्योंकि गणपति तो अनादि देव हैं। मैया मैना ने मां पार्वती को गृहस्थ जीवन की शिक्षा दी। देवताओं ने पुष्प वृष्टि की। सारा जगत धन्य धन्य हो गया। इसे सुंदर शिव विवाह की कथा को जो श्रवण करेगा। वह साक्षात् शिव पद का अनुरागी होगा।

आज कथा में विशेष रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री संजय टंडन सह प्रभारी हिमाचल प्रदेशने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर मंदिर सभा से पैटर्न राकेश कुमार गर्ग,पैटर्न दुलि चंद ,चेयरमैन जय भगवान गर्ग, अध्यक्ष राजकुमार सिंगला, सुरेंद्र नायाब,राजवीर गर्ग, फकीर चंद, दीपक मित्तल,रोशन लाल, श्यामलाल बंसल, मूर्ति बंसल अपनी पूरी महिला मंडल के साथ उपस्थित रही