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भीषण गर्मी (Extreme Heat) का सामना करने के क्षेत्रीय प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य दिवस पर ‘साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब’ की शुरुआत…

एशिया के प्रमुख थिंक टैंकों में से एक CEEW (काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर) ‘ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ के दक्षिण एशिया हब की मेजबानी करेगा। यह पहल SFC, NRDC, BRAC JPGSPH और UNESCAP जैसे भागीदारों के सहयोग और IITM और IMD के साथ तालमेल से काम करेगी।_

साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब , ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क की एक पहल है, जिसका नेतृत्व डब्ल्यूएचओ-डब्ल्यूएमओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन – विश्व मौसम विज्ञान संगठन) का ‘जलवायु और स्वास्थ्य संयुक्त कार्यक्रम’ कर रहा है।

नई दिल्ली, 07 अप्रैल 2026: संपूर्ण दक्षिण एशिया में गर्मी के तापमान में पहले से वृद्धि हो रही है और विज्ञान उन तमाम अनुभवों की पुष्टि कर रहा है, जिसे विभिन्न समुदाय वर्षों से महसूस करते आ रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक प्रमुख रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में दर्ज किया गया वैश्विक तापमान इंसानों द्वारा सामूहिक रूप से अब तक मापा गया सर्वाधिक तापमान है। यही कारण है कि आज विश्व स्वास्थ्य दिवस पर अग्रणी अनुसंधान, नीति और विकास संगठनों के समूह (consortium) ने ‘ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ (जीएसएचआईएन) के ‘दक्षिण एशिया हब’ (_Link_: https://heathealth.info/southasia/) की शुरुआत की है। ‘वेलकम’ (Wellcome) से वित्तपोषित इस नए क्षेत्रीय हब की मेजबानी नई दिल्ली स्थित ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर’ (CEEW) कर रहा है। (Please see English Press Release here: https://heathealth.info/news/south-asia-hub-launched/)

पांच समन्वयकारी भागीदार – सीईईडब्ल्यू, सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव (SFC), नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC), ब्रैक जेम्स पी. ग्रांट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (BRAC JPGSPH), और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसिफिक (UNESCAP)- एक साथ मिलकर साझा समझ को बेहतर बनाने और नीतिगत बदलावों के लिए पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार, शिक्षा जगत, निजी उद्यमों और नागरिक समाज के हितधारकों को जोड़ेंगे।

यह हब भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के ‘साउथ एशिया क्लाइमेट एंड हेल्थ डेस्क’ और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्मी की प्रारंभिक चेतावनी और हीट साइंस (ताप विज्ञान) को समुदायों के लिए प्रभावशाली समाधान बनाने में इस्तेमाल किया जा सके।

यह हब ज्ञान और सफल पद्धतियों के आदान-प्रदान के लिए एक क्षेत्रीय मंच के रूप में काम करेगा। इसके लिए, यह नीति-निर्माण के लिए पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध कराने, व्यावहारिक हस्तक्षेपों को लागू करने और विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए गर्मी का जोखिम घटाने के लिए स्थानीय हितधारकों को जोड़ने का भी काम करेगा।

ताप विज्ञान (हीट साइंस) को स्वास्थ्य कार्रवाई में बदलना

एशिया विश्व के अन्य हिस्सों की तुलना में दोगुनी दर से गर्म हो रहा है। 1990 से 2021 के बीच, वैश्विक गर्मी से जुड़ी कुल मौतों में से आधी से अधिक मौतें इसी क्षेत्र में हुई थीं। दक्षिण एशिया गर्मी के संकट के सबसे तीखे हमले का सामना कर रहा है: अनुमान है कि 2030 तक इसकी लगभग 90 प्रतिशत आबादी को भीषण गर्मी (Extreme Heat) का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद, क्षेत्रीय स्तर पर नीतियों और प्रतिक्रिया के बीच तालमेल में बिखराव रहता है। दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों की राष्ट्रीय प्रणालियों या संरचनाओं में अभी भी स्वास्थ्य-आधारित चेतावनियों (health-triggered warnings) का अभाव है।

सीईईडब्ल्यू के एक शोध के अनुसार, अकेले भारत में 57 प्रतिशत जिले – जहां लगभग तीन-चौथाई आबादी रहती है – पहले से उच्च से बहुत उच्च गर्मी के जोखिम (very high heat risk) का सामना कर रहे हैं। रात्रिकालीन तापमान और आर्द्रता (humidity) में वृद्धि गर्मी से जुड़ी समस्याओं (हीट स्ट्रेस) को और अधिक बढ़ा रहा है। इससे शरीर की गर्मी से छुटकारा पाने की क्षमता घट रही है और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी अतिरिक्त दबाव आ रहा है। बांग्लादेश में पिछले चार दशकों में ‘महसूस किए जाने वाले तापमान’ (felt temperatures) में 4.5 डिग्री की वृद्धि देखी गई है। यहां तक कि नेपाल और भूटान जैसे अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी देशों में भी अब लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है।

अप्रैल 2026 से परिचालन शुरू करते हुए, ‘साउथ एशिया ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क हब’ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि परिवारों, श्रमिकों, स्कूलों, अस्पतालों और नगरीय संस्थाओं के अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी, सुरक्षित कामकाजी घंटे, समयानुकूल कूलिंग उपायों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत नीतिगत सलाह देते हुए प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा सके। यह हब अन्य विषयों के अलावा निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करेगा:

संस्थानों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का एक क्षेत्रीय नेटवर्क बनाना: संपूर्ण दक्षिण एशिया में जलवायु, स्वास्थ्य और शहरी नियोजन से जुड़े क्षेत्रों के बीच संपर्क लाना, ताकि सेहत सुरक्षा के लिए कौशल विकास और उसे साझा करने, ज्ञान के आदान-प्रदान, दूसरी संस्थाओं से सीखने, गर्मी से निपटने की समन्वित कार्रवाइयां बनाने जैसे काम किए जा सकें।

विज्ञान को नीतियों में बदलना: स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर सरकारों के साथ मिलकर आंकड़ों को उनके फैसलों का आधार बनाने की दिशा में काम करना। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट्स, और गर्मी के मौसम से पहले और बाद में ब्रीफिंग व जानकारी का उपयोग किया जाएगा, ताकि सरकारों और समुदायों के लिए कार्रवाई योग्य तैयारियों को सुनिश्चित किया जा सके।

हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत बनाना: क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु केंद्रों के साथ मिलकर काम करना, ताकि मौसम संबंधी पूर्वानुमान और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया में मौजूद कमी दूर की जा सके।

सफल प्रयासों का दस्तावेजीकरण और विस्तार: स्थानीय भागीदारों से सीखे गए अनुभवों को जुटाना, विभिन्न क्षेत्रों में सफल पद्धतियों का दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना कि दक्षिण एशिया के प्रमुख अनुभव वैश्विक ज्ञान प्लेटफार्मों तक पहुंच सकें।

अगले कुछ वर्षों में, इस हब का लक्ष्य 60 से अधिक संस्थानों को जोड़ना, 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करना और संपूर्ण दक्षिण एशिया में हीट एक्शन प्लान (गर्मी का सामना करने की योजनाएं बनाना) को मजबूत बनाना है।

‘साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब’ की अध्यक्षता सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. विश्वास चितले करेंगे, जिन्होंने भारत में जिला-स्तरीय हीट रिस्क असेसमेंट (गर्मी के जोखिम का आकलन) और हीट एक्शन प्लानिंग पर प्रमुखता से काम किया है।

डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), ने कहा, “भीषण गर्मी (Extreme Heat) महज एक मौसमी खतरा भर नहीं है; यह संपूर्ण दक्षिण एशिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक उत्पादकता और बुनियादी ढांचे के लिए व्यवस्थागत जोखिम है। यह गर्मी जलवायु, स्वास्थ्य, श्रम और शहरी विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती है, जो इसे खास तौर पर खतरनाक बना देता है। इसके बावजूद, गर्मी का सामना करने के उपाय अक्सर विखंडित रहते हैं। सीईईडब्ल्यू में, हम गर्मी के जोखिम को बारीकी से समझने के लिए जरूरी आंकड़ों, विश्लेषण और नीतिगत साझेदारियों को तैयार कर रहे हैं। साक्ष्यों को क्षेत्रीय सहयोग से जोड़ने के लिए बने ‘ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ के ‘साउथ एशिया हब’ की मेजबानी करना हमारे लिए सम्मान की बात है। संपूर्ण दक्षिण एशिया में सरकारों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, हम ताप विज्ञान (हीट साइंस) को एक ऐसे समन्वित हीट एक्शन में बदलने की उम्मीद कर रहे हैं, जो सबसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा कर सके।”

अलेजांद्रो साएज रियल, कोऑर्डिनेटर, ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (GHHIN) ने कहा, “साउथ एशिया हब का शुभारंभ ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क के वैश्विक विस्तार में मील का पत्थर है। गर्मी से सर्वाधिक प्रभावित शहर और समुदाय इसी क्षेत्र में पड़ते हैं, और लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध विज्ञान, उपकरणों और आपसी ज्ञान तक पहुंच होना बहुत जरूरी है। यह हब आदान-प्रदान का एक ऐसा ढांचा बनाता है, जो दक्षिण एशिया के हितधारकों और संस्थानों को विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बढ़ते वैश्विक समुदाय से जोड़ने का काम करेगा। इनमें से कई लोग इस माह के अंत में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आगामी ‘ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम’ में एक मंच पर आएंगे, जो गर्मी की समस्या को एक महत्वपूर्ण और कार्रवाई योग्य प्राथमिकता बनाने की दिशा

डॉ. जॉय शुमाके-गुइलेमोट, लीड, डब्ल्यूएचओ-डब्ल्यूएमओ क्लाइमेट एंड हेल्थ ज्वाइंट प्रोग्राम ने कहा, “जलवायु परिवर्तन अधिक तेज और बार-बार होने वाली गर्मी की वजह बन रहा है, जिसका हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बहुत अधिक असर पड़ रहा है। हमारे पास हीट एक्शन प्लान, अर्ली वार्निंग सिस्टम और विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान के जरिए प्रतिक्रिया देने के उपाय मौजूद हैं, लेकिन ये तभी काम करते हैंं जब संस्थानों के बीच में संपर्क हो और इसके भागीदारों ने बिल्कुल यही काम करने की जिम्मेदारी ली है।”

डॉ. कैथरीना कोरा बोहमे, ऑफिस इन्चार्ज, डब्ल्यूएचओ रीजनल ऑफिस फॉर साउथ एशिया ने कहा, “भीषण गर्मी (Extreme Heat) हमारे समय के सबसे प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों में से एक है, फिर भी यह अक्सर नीतियों और योजनाओं में अदृश्य बनी रहती है। विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई के संबंध को मजबूत करना जरूरी है। यह हब विश्व स्वास्थ्य दिवस की जीवन की रक्षा के लिए विज्ञान के साथ खड़े होने की भावना को दर्शाता है।”

दीपा सिंह बगई, कंट्री डायरेक्टर, नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल इंडिया (एनआरडीसी इंडिया) ने कहा: “भीषण गर्मी (Extreme Heat) अब दूर का जलवायु खतरा नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण दक्षिण एशिया में जीवन, आजीविका और आर्थिक स्थिरता के लिए एक मौजूदा और बढ़ता हुआ जोखिम है। भारत में एनआरडीसी के अनुभव ने दिखाया है कि विज्ञान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित सुव्यवस्थिति रूप से बनाए गए ‘हीट एक्शन प्लान’ जीवन बचा सकते हैं। साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब का शुभारंभ इस संपूर्ण क्षेत्र में इन प्रमाणित समाधानों को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दक्षिण एशिया के जलवायु अनुकूलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नेतृत्व के बीच सहयोग को मजबूत करके, यह साझेदारी क्षेत्र को सिर्फ प्रतिक्रियात्मक कदमों की जगह पर सबसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा करने वाली एक सक्रिय और समन्वित कार्रवाई की दिशा में ले जाने में मदद करेगी।”

डॉ. भार्गव कृष्ण, कन्वीनर, सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव (SFC), ने कहा: “भीषण गर्मी (Extreme Heat) पहले से ही एक सार्वजनिक स्वास्थ्य इमरजेंसी है और अनुमान बताते हैं कि आने वाले वर्षों में लू (heatwaves) की संख्या और तीव्रता में और अधिक वृद्धि होगी। भारत ने हाल के वर्षों में गर्मी के प्रभावों का प्रबंधन में अपना नेतृत्व दिखाया है, लेकिन लंबे समय में गर्मी का सामना करने की क्षमता (heat resilience) बनाने वाली प्रणालियों को तैयार करना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य, आजीविका और आर्थिक उत्पादकता पर गर्मी के हानिकारक प्रभाव रोके जा सकें। इस हब का उद्देश्य संस्थानों, शासन तंत्रों और नीतियों के विश्लेषण के साथ अत्याधुनिक महामारी विज्ञान (epidemiology) को एक साथ लाना है, जो भारत और दक्षिण एशिया में वर्तमान और भविष्य में गर्मी के समानतापूर्ण और साक्ष्य-आधारित प्रबंधन को बढ़ावा दे सके।”

श्री कियॉन्ग को, डायरेक्टर, आईसीटी एंड डिजास्टर रिस्क रिडक्शन डिवीजन, यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसेफिक (UNESCAP) ने कहा, “भीषण गर्मी (Extreme Heat) एक क्षेत्रीय और सीमाओं के आर-पार असर डालने वाला जोखिम है। विभिन्न देशों को एक साथ लाकर, यह हब साझेदारियों को मजबूत कर सकता है, नीतियों में अनुरूपता ला सकता है, और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक आपदा जोखिम और जलवायु लचीलेपन के ढांचे में गर्मी के विषय को भी जोड़ सकता है।

डॉ. फरजाना मिशा, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य हब, ब्रैक जेम्स पी. ग्रांट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (BRAC JPGSPH) ने कहा, “भीषण गर्मी (Extreme Heat) कोई भविष्य का जोखिम नहीं है; यह पहले से यहां पर मौजूद है। चक्रवात या बाढ़ के विपरीत, यह कम दिखाई देती है और इसलिए अक्सर इसे नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम सामने आते हैं। यह स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर लगातार दबाव डालती है, भोजन और जल सुरक्षा को बाधित करके सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। दक्षिण एशिया में, जो सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील और कम तैयार क्षेत्रों में से एक है, यह चुनौती विशेष रूप से गंभीर है। जीएचएचआईएन का साउथ एशिया हब इस बढ़ते खतरे का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए क्षेत्रीय ज्ञान, साझा अनुभवों और सामूहिक कार्रवाई को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

जैसे-जैसे दक्षिण एशिया में गर्मी का जोखिम बढ़ रहा है, यह हब विखंडित उपायों के बजाए क्षेत्रीय स्तरों पर समन्वय के साथ विज्ञान-आधारित ‘हीट-केंद्रित’ कार्रवाई की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक है। ज्ञान के आदान-प्रदान, नीतिगत नवाचार और क्षमता निर्माण के लिए इस क्षेत्र के मुख्य आधार तौर पर काम करते हुए, यह विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं के एक मजबूत और परस्पर जुड़ाव वाले पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को बढ़ावा देगा। यह साक्ष्य-आधारित और न्यायसंगत समाधानों के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करेगा, ताकि सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे।

For media queries and interviews, contact:

Council on Energy and Water (CEEW) – Rishi Singh – rishi.singh@ceew.in, Tulshe Agnihotri – tulshe.agnihotri@ceew.in

WHO-WMO Climate and Health Joint Programme and GHHIN – Petra Hongell – phongell@wmo.int

NRDC – Smriti George – sgeorge@nrdcindia.org

Sustainable Futures Collaborative (SFC) – Sonali Verma — sonali@sustainablefutures.org/Kartikeya Jain — kartikeya@sustainablefutures.org

UNESCAP – Madhurima Sarkar-Swaisgood — sarkar-swaisgood@un.org /escap-ckms@un.org

BRAC James P Grant School of Public Health (BRAC JPGSPH) – Tasnim Kabir — tasnim.kabir@bracu.ac.bd