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हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गूंजा “हर-हर महादेव” का जयघोष…..

चंडीगढ़ के सेक्टर 29 स्थित श्री बाबा बालक नाथ मंदिर में आयोजित अष्टदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का आज भव्य समापन हुआ। समापन दिवस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर शिवमय वातावरण में डूबा रहा और भक्तों ने श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ कथा श्रवण किया।

कथा वाचक श्री गोपाल शुक्ल जी महाराज ने समापन दिवस पर अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ऋषि दुर्वासा का जन्म भगवान शिव के अंश से हुआ था। इसके साथ ही श्री हनुमान जी के रुद्रावतार स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया कि उनका जन्म भी शिव जी के अंश से हुआ, इसलिए वे रुद्रावतार कहलाए।

महाराज श्री ने नंदीश्वर (नंदी) के जन्म की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नंदी जी ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न किया। शिव जी ने उन्हें अमरत्व का वरदान देते हुए अपना परम वाहन बनाया, जबकि माता पार्वती ने उन्हें अपने पुत्र गणेश के समान स्नेह प्रदान किया।

कथा के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों की मूल कथा भी सुनाई गई। महाराज श्री ने बताया कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तभी भगवान शिव अनंत ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए और कहा कि जो इस स्तंभ का आदि या अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ होगा। विष्णु भगवान वराह रूप में नीचे की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस रूप में ऊपर की ओर, किंतु दोनों असफल रहे। विष्णु ने सत्य स्वीकार किया, जबकि ब्रह्मा ने असत्य कहा। इस पर शिव जी ने ब्रह्मा को दंडित किया और विष्णु को वरदान दिया। उसी ज्योति-स्तंभ के पृथ्वी पर प्रकट स्थलों को ज्योतिर्लिंग कहा गया।

महाराज श्री ने द्वादश ज्योतिर्लिंग—सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ धाम, नागेश्वर, रामेश्वरम् और घृष्णेश्वर—की संक्षिप्त कथाओं का वर्णन करते हुए उनके आध्यात्मिक महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि ज्योतिर्लिंग केवल मंदिर नहीं हैं, बल्कि यह इस सत्य का प्रतीक हैं कि शिव चेतना सर्वत्र व्याप्त है और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली दिव्य ऊर्जा है।

समापन अवसर पर कथा वाचक श्री गोपाल शुक्ल जी महाराज ने मुख्य यजमान श्रीमती ज्योत्सना शर्मा, मंदिर प्रधान, सभा सदस्यों, सभी श्रद्धालुओं, भक्ति-भाव से उपस्थित माताओं एवं ‘गोपाल जी भक्ति मार्ग’ यूट्यूब/फेसबुक पेज पर लाइव कथा देखने वाले भक्तों को आशीर्वाद देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कामना की कि भगवान शिव की कृपा सभी पर सदा बनी रहे।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ अष्टदिवसीय शिव महापुराण कथा का विधिवत समापन हुआ। मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।