रेयर अर्थ कॉरिडोर’ की घोषणा राष्ट्रीय नीतियों और नियामकीय सुधारों से हटकर स्थानीय मूल्य संवर्धन के जरिए राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव…
ऋषभ जैन, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने कहा, “रेयर अर्थ कॉरिडोर’ (Rare Earth Corridors) की घोषणा राष्ट्रीय नीतियों और नियामकीय सुधारों से हटकर स्थानीय मूल्य संवर्धन (local value add) के जरिए राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ (NCMM) और हालिया ‘मैग्नेट विनिर्माण योजना’ को तटीय राज्यों में जमीन पर उतारकर उन्हें आगे बढ़ाती है। खनिज संपन्न राज्यों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थापित करके, हम अपस्ट्रीम माइनिंग (खनन) और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) के बीच के अंतर को पाट रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट इस इरादे को ठोस वित्तीय सहायता भी देता है, विशेष रूप से ‘अनुसूची XII’ के तहत खोज (exploration) के लिए कर कटौती को विस्तार और प्रसंस्करण मशीनरी पर आयात शुल्क में छूट देकर। यह कदम सीधे तौर पर
निजी क्षेत्र के प्रवेश से जुड़े जोखिमों को घटाता (de-risk) है।
‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क’, स्टॉकपाइलिंग नीति और एनसीएमएम के तहत बने उत्कृष्टता केंद्रों (एक्सिलेंस सेंटर) जैसी मौजूदा पहलों का लाभ उठाकर इसे लागू करने की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है।”
सीईईडब्ल्यू का विश्लेषण रेखांकित करता है कि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में ‘खनिज प्रसंस्करण’ (mineral processing) प्रमुख लापता कड़ियों में से एक है। हालांकि, इन कॉरिडोर की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को घरेलू मांग सुरक्षित करने वाली ‘ऑफटेक गारंटी’ (offtake guarantees) पर भी ध्यान देना होगा। साथ में, शोध और विकास (R&D) को दोगुना करना होगा और जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ साझेदारियों का लाभ उठाकर जटिल ‘सिंटरिंग प्रक्रियाओं’ (sintering processes) के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (प्रौद्योगिकी हस्तांतरण) को आसान बनाना होगा।”


