लाइव कैलेंडर

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  

LIVE FM सुनें

India News24x7 Live

Online Latest Breaking News

बजट में 20,000 पशु चिकित्सा पेशेवरों को जोड़ने और ब्रीडिंग सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया….

अभिषेक जैन, फेलो और डायरेक्टर (ग्रीन इकोनॉमी एंड इम्पैक्ट इनोवेशन),सीईईडब्ल्यू ने कहा, “बजट में 20,000 पशु चिकित्सा पेशेवरों को जोड़ने और ब्रीडिंग सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। पशु स्वास्थ्य और देश के पशुधन की आनुवंशिक प्रोफाइल (genetic profile) को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक सराहनीय कदम है। हालांकि, पशु स्वास्थ्य का एक अनिवार्य हिस्सा पशु पोषण — चारा और दाना, भी है। सीईईडब्ल्यू के हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत में प्रत्येक चार में से तीन पशुपालक चारे की कमी का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद ‘साइलेज’ (silage) बनाने और आहार संतुलन (ration balancing) जैसे पोषण संबंधी उपायों के प्रति जन-जागरूकता और उनका उपयोग क्रमशः 20% और 5% तक ही सीमित है।” जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पशुधन की संख्या में वृद्धि चारे के विस्तार की तुलना में अधिक रही है, जिससे हरे चारे की उपलब्धता में 11 से 32 प्रतिशत तक की कमी आई है। पशुओं के पोषण की इन बुनियादी खामियों को दूर किए बगैर स्वास्थ्य और ब्रीडिंग से संबंधित प्रयास अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में कमजोर रहेंगे। पशुओं के पोषण के इस कमी को दूर करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।”

हेमंत मल्या, फेलो, सीईईडब्ल्यू ने कहा, “भारी उद्योगों का कार्बन उत्सर्जन घटाने (decarbonise) के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन और सीसीयूएस (कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज) की तकनीक बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। इन उद्योगों में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन काफी अधिक है, जिसे ऊर्जा दक्षता, वैकल्पिक ईंधन और अक्षय ऊर्जा जैसे मौजूदा विकल्पों से पूरी तरह नहीं घटाया जा सकता है। इसके लिए हमें भूमिगत खारी जलधाराओं (saline aquifers) और बेसाल्ट खनिजों में मौजूद अपने विशाल भूमिगत भंडारण संसाधनों का लाभ लेना होगा। सीईईडब्ल्यू के आकलन के अनुसार, यह भंडारण क्षमता 350 गीगाटन से अधिक है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का कुशल कार्यान्वयन और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए राज्यों के स्तर पर मिलने वाले 61 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रोत्साहन, सीसीयू (कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन) की लागत घटाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।”

डॉ. विश्वास चितले, फेलो, सीईईडब्ल्यू,ने कहा, “12.2 लाख करोड़ रुपये के बढ़े हुए आवंटन के साथ, यह बजट टियर-2 और टियर-3 शहरों के बुनियादी ढांचे के विकास को बहुत अधिक मजबूती देता है। इससे ऐसे जलवायु-अनुकूल (climate resilient) शहरों को बनाने में मदद मिलेगी, जो आर्थिक विकास के केंद्र भी होंगे। 16वें वित्त आयोग के अनुसार, 2026-31 के लिए ‘आपदा जोखिम प्रबंधन कोष’ (DRMF) हेतु 2.04 लाख करोड़ रुपये की सिफारिश की गई है, जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। सीईईडब्ल्यू का शोध रेखांकित करता है कि भारत के 60 प्रतिशत जिलों में रहने वाली लगभग दो-तिहाई आबादी अत्यधिक गर्मी (extreme heat) के जोखिम का सामना करती है। 16वें वित्त आयोग में ‘हीटवेव’ (लू) और ‘आकाशीय बिजली’ (lightning) को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं में शामिल करना, गर्मी से बचाव की क्षमता (हीट-रेजिलिएंस) की दिशा में भारत के प्रयासों की एक बड़ी जीत है।”