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गरीबों के बच्चों का भविष्य कुचल रही है चण्डीगढ़ प्रशासन की संवेदनहीन नीति….

कमलेश बनारसी दास, पूर्व मेयर चण्डीगढ़ ने रामदरबार कॉलोनी फेज-2 स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल का औचक दौरा किया। यह दौरा बच्चों और उनके अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद किया गया, जिनमें बताया गया था कि स्कूल में हर 4–5 महीनों में प्रिंसिपल बदले जाते हैं, जिससे पढ़ाई और स्कूल का पूरा माहौल खराब हो रहा है।

दौरे के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद शर्मनाक है। स्कूल में पिछले लगभग तीन महीनों से न तो प्रिंसिपल तैनात है और न ही वाइस प्रिंसिपल। जिस अधिकारी को इस स्कूल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल है। यह साफ़ दर्शाता है कि चण्डीगढ़ प्रशासन को कॉलोनी के बच्चों की कोई चिंता नहीं है।

शहर के पॉश इलाकों के स्कूलों में तुरंत प्रिंसिपल तैनात कर दिए जाते हैं,लेकिन गरीब बस्तियों के स्कूल भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।

कमलेश बनारसी दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर इस स्कूल का आने वाला रिज़ल्ट खराब आता है, बच्चे फेल होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी चण्डीगढ़ प्रशासन की होगी। बच्चों के भविष्य से हो रहा यह खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह सवाल उठता है कि क्या कॉलोनी के बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं है?

क्या इनके लिए स्थाई प्रिंसिपल लगाना प्रशासन को जरूरी नहीं लगता?

क्या कॉलोनी के स्कूलों में पोस्टिंग अफसरों की “शान के खिलाफ” मानी जाती है?

अक्सर देखा गया है कि अधिकारी कॉलोनी के स्कूलों में पोस्टिंग से बचने के लिए जॉइन करने से पहले ही अपनी बदली शहर के स्कूलों में करवा लेते हैं और प्रशासन चुपचाप सब देखता रहता है।

कमलेश बनारसी दास ने यह भी घोषणा की कि वे जल्द ही एजुकेशन सेक्रेटरी, श्रीमती प्रेरणा पुरी से मुलाकात करेंगे और इस स्कूल में तुरंत एक परमानेंट प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल की नियुक्ति की मांग करेंगे। यदि इसके बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो कॉलोनीवासी मजबूर होकर बड़ा जन आंदोलन करेंगे।

गरीबों के बच्चों को दोयम दर्जे का नागरिक समझने की नीति अब नहीं चलेगी। बच्चों का भविष्य किसी अफसर की लापरवाही या प्रशासन की उदासीनता की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।

कमलेश बनारसी दास

पूर्व मेयर, चण्डीगढ़।