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टैगोर द्वारा रचित रचनाओं ने दर्शकों का मन मोहा….

चंडीगढ़ 20 मई, 2024 : रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय कला व सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। उनकी लेखनी की अमिट छाप आज भी हम सभी के दिलों पर राज करती है। इतना ही नहीं आज की युवा पीढ़ी भी उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों को पढ़ने का शौक रखते हैं। इसलिए उन्हें सदी का साहित्यकार कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह बात कालीबाड़ी सामाजिक -सांस्कृतिक, धार्मिक और धर्मार्थ संगठन चंडीगढ़ के अध्यक्ष प्रणब सेन ने रविवार को टैगोर थिएटर में गुरुदेव रबिन्द्र नाथ टैगोर की जयंती पर आयोजित समारोह के दौरान कही।

उन्होंने बताया कि उनकी जयंती को यादगार बनाने हेतु संस्था द्वारा उनके द्वारा रचित प्रथम कबिता, श्यामा, काबुलीवाला, भिखारिनी रचनाओं का सफल मंचन संगीत कथा, गीत रचनात्मक नृत्य के साथ साथ रचनाओं को कैनवास पेंटिंग के पटल पर उखेरा जिसकी छटा देखते ही बनती थी।

प्रथम कबिता के सफल मंचन पर कलाकार अमृता ,काव्यात्मक कथन के लिए जी एस दासगुप्ता, गीत प्रस्तुति के लिए अमृता और अनन्या, रचनात्मक के लिए परिस्मिता और अनिर्बान ने उपस्थित दर्शकों का अपनी कला से मन मोह लिया। कैनवास पर स्पॉट पेंटिंग के लिए नृत्य और शोमा दास को रचनात्मक कलाकार के रूप में सम्मानित किया गया।

उधर टैगोर की काबुलीवाला, बंगाली में एक लघु कहानी – टैगोर की एक और क्लासिक, पारलौकिक मानव बंधन और सार्वभौमिक पितृत्व की कहानी का भी शिबाशीष दासगुप्ता द्वारा मंचन किया गया जिसमें श्री पीयूष नंदी काबुलीवाला और 7 वर्षीय ऐशनी की मुख्य भूमिका निभाई।

भिखारिन, हिंदी में एक लघु कहानी – सार्वभौमिक मातृत्व का एक दिल दहला देने वाला नाटक का भी सफल मंचन हुआ । टैगोर के एक और क्लासिक नाटक : इस नाटक का निर्देशन सूर्यवंशी थिएटर ग्रुप से जुड़े श्री संजय कश्यप ने किया।

श्यामा, एक और महाकाव्य रचना, जो जुनून और अपराध, प्रेम और बलिदान, पाप, क्षमा और प्रतिशोध की एक जटिल कहानी बताती है,का निर्देशन अमृता गांगुली ने किया और अर्चिता पालित ने इसकी कोरियोग्राफी की।