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बिना सर्जरी के हार्ट वाल्व बदलने की आधुनिक तकनीक टीएवीआर बुजुर्ग मरीजों के लिए वरदान: डा. अंकुर आहूजा…

रोपड़, 14 फरवरी ( ): सर्दियों के मौसम में दिल के मरीजों की संख्या में इजाफा होना लाजमी है, ऐसे में बुजुर्ग एवं अति गंभीर व कमजोर मरीजों की छाती में चीरफाड़ के बिना अब कमर के रास्ते से नए एओर्टिक वाल्व को सरलता से बदला जा रहा है। यह बात आज रोपड़ में आयोजित एक प्रैस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जाने माने हृदय रोग माहिर डा. अंकुर आहूजा ने कही, जो कि बुजुर्ग मरीजों में हार्ट वाल्व की समस्या तथा बिना हार्ट ओपन से हार्टवाल्व बदलने के उपचार संबंधी जागरूक करने के लिए शहर में पहुंचे थे।

फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के सीनियर कंस्लटेंट डा. अंकुर आहूजा ने बताया कि दिल के वाल्व की समस्या या बीमारी के समय वाल्व बदला जाता है। उन्होंने बताया कि वाल्व बदलना एक आम डाक्टरी प्रक्रिया है, जिसमें एरोटिक वाल्व बदला जाता है। डा. आहूजा ने बताया कि कई बार बुढ़ापे में यह वाल्व सुकूड़ जाता है या मोटा हो जाता है। उन्होंने बताया कि पहले दिल का आप्रेशन (ओपन हार्ट सर्जरी) करके वाल्व बदला जाता था, जिस कारण बुजुर्ग मरीज यह आप्रेशन नहीं करवा सकते थे। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी अगुवाई वाली टीम ने ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) की सबसे उन्नत तकनीक के माध्यम से केवल 43 किलोग्राम वजन वाली 73 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया है।

उन्होंने बताया कि उक्त मरीज को दिल की धडक़न के साथ सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जांच करने पर उनके एओर्टिक वाल्व में खराबी का पता चला। अनुपचारित रोगग्रस्त एओर्टिक वाल्व अंतत: हार्ट फेल, सीने में दर्द और यहां तक कि मृत्यु का कारण बन सकता है। डॉ. आहूजा द्वारा मरीज पर टीएवीआर का आयोजन किया गया, जिसमें उनके रोगग्रस्त एओर्टिक वाल्व को आर्टिफिशियल वाल्व से बदल दिया गया। इस उपरांत मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई और रोटेव्लेशन और आईवीयूएस की मदद से उसकी कोरोनरी धमनियों में स्टंट लगाया गया। मरीज को ऑपरेशन के बाद आसानी से रिकवरी का अनुभव हुआ, प्रक्रियाओं के दौरान इस्तेमाल किए गए कंट्रास्ट के बावजूद उसकी किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ

उन्होंने बताया कि टीएवीआर तकनीक का प्रयोग करने से सीने को पूरी तरह से खोलना नहीं पड़ता, बल्कि पैर की नस या कमर के पास से कैथेटर लेकर दिल तक पहुंचकर वाल्व को बदला या स्थापित किया जाता है। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों खासकर बेहद कमजोर मरीजों के लिए ओपन हार्ट सर्जरी काफी रिस्की रहती है, ऐसे में बिना सर्जरी वाल्व बदलना के लिए टीएवीआर तकनीक ऐसे मरीजों के लिए एक वरदान की तरह है। उन्होंने बताया कि टीएवीआर रोगग्रस्त महाधमनी वाल्व को बदलने के लिए एक मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया है, जो संकुचित है और मानव निर्मित वाल्व के साथ पूरी तरह से नहीं खुलता है। नए एओर्टिक वाल्व को छाती को खोले बिना कमर के रास्ते से ट्रांसप्लांट किया जाता है।

ऐसे मरीजों की पहचान संबंधी डा. आहूजा ने बताया कि एरोटिक वाल्व में समस्या के कारण मरीज के शरीर को कम रक्त पहुंचता है, जिससे सांस लेने, थकावट, छाती में दर्द तथा टांगों की सोजिश जैसे कई लक्ष्ण दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि अब सर्जरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट टीएवीआर आ गई है।