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प्राचीन कला केंद्र की 292वीं मासिक बैठक में सोहिनी रॉय चौधरी के मधुर शास्त्रीय गायन से सजी शाम…

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित की जाने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला में आज केन्द्र की 292वीं मासिक बैठक का आयोजन केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में किया गया जिसमें कोलकाता से आई शास्त्रीय गायिका सोहिनी रॉय चौधरी द्वारा एक मधुर शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति पेश की गई ।

संगीत कलाकारों के परिवार में जन्मीं सोहिनी रॉय चौधरी महान संगीत निर्देशक आर. डी. बर्मन की शिष्या और भतीजी हैं और अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर आज सोहिनी सफल शास्त्रीय गायिकों की श्रेणी में आती हैं। शैक्षणिक रूप से सोहिनी एक सक्षम चार्टर्ड एकाउंटेंट तथा एक शीर्ष रैंक वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीएफओ के पद पर कार्यरत हैं । अपने वंश के अनुरूप वह न केवल एक बेहतरीन आवाज बल्कि कलात्मक प्रवृत्ति की भी धनी हैं। उन्होंने चार साल से कम उम्र में अपनी संगीत यात्रा शुरू की और अपने चाचा और गुरु आर. डी. बर्मन का संरक्षण में संगीत की बेहतरीन शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्हें उस्ताद सगीरुद्दीन खान, पंडित ए.टी. कानन,मालविका कानन, उस्ताद मसकूर अली खान के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी। सोहिनी ने ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती, सावनी, झूला में उनके समृद्ध प्रदर्शन के लिए लोकप्रियता हासिल की है इन्होंनें देश ही नहीं विदेशों में अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया है। इनके दादा द्वारा स्थापित गीती बीथिका नामक संस्था की स्थापना 70 के दशक में प्राचीन कला केंद्र से संबद्धता प्राप्त सेंटर है जोकि कोलकाता में स्थित है वहां गायन , वादन , नृत्य एवं चित्रकला की शिक्षा प्रदानं की जाती है।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत राग सोहिनी ने राग मारु बिहाग से की जिसमें पारम्परिक आलाप के पश्चात इन्होंनें विलम्बित एक ताल में निबद्ध रचना ” रसिया न जाओ बहु देस ” पेश की । इसके उपरांत सोहिनी ने द्रुत तीन ताल से सजी रचना ” जागूँ मैं सारी रैन बलमा” पेश की जिसे दर्शकों ने बहुत सराहा । इसके उपरांत सोहिनी ने कार्यक्रम को और भी मधुर बनाने के लिए राग मिश्र खमाज ताल में निबद्ध ठुमरी जिसके बोल थे ‘‘ व्याकुल भया ब्रज गांव बाँसुरिया न बजाओ मेरे शाम ’’ प्रस्तुत करके खूब तालियां बटोरी । कार्यक्रम का समापन सोहिनी ने खूबसूरत दादरा से किया।

इनके साथ तबले पर चंडीगढ़ के जाने माने तबला वादक श्री महेंद्र प्रसाद तथा हारमोनियम पर दिल्ली से आये ज़ाकिर धौलपुरी ने बेहतरीन संगत करके कार्यक्रम को और भी खूबसूरत बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं कत्थक गुरु तथा केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया

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