केन्द्र की 286 वीं मासिक बैठक में सुरों की धारा के मधुर प्रवाह में बहे दर्शक…
भारतीय कलाओं के प्रचार एवं प्रसार में विधिवत निरंतर कार्यरत संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा पिछले 24 वर्षो से निरंतर मासिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है । इसी सिलसिले की अगली कड़ी में आज यहां 286 वीं मासिक बैठक का आयोजन केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में किया गया । जिसमें दिल्ली से आए जाने माने शास्त्रीय गायक सुरेश गंधर्व द्वारा शास्त्रीय गायन पेश किया गया । जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । धनपत सिंह, राज्य निर्वाचन
आयुक्त, हरियाणा इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
मूलरूप से हरियाणा में जन्में सुरेश ने हरियाणवी गायकी से शुरूआत की । बाद में इन्होंने इंदौर घराने के गुरू रविंद्र बिष्ट के शिष्यत्व में संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त की । 1982 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे सुरेश गंधर्व ने देश के लगभग सभी शहरों में अपनी प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों के दिल में जगह बनाई है ।
आज के कार्यक्रम की शुरूआत इन्होंने राग यमन से की जिसमें बड़े ख्याल की रचना ‘‘कजरा कैसे डारूं’’ पेश की । इसके उपरांत छोटा ख्याल जोकि ‘‘ऐसे सुंदर सुघरवा बालमवा’’ बंदिश से सजा था प्रस्तुत करके दर्शकों का मन मोह लिया । इसके उपरांत राग मेघ से सजी रचना जो कि झपताल में निबद्ध थी पेश की इसके बोल थे ‘‘ गरजे घटा घनन घोर ’’ रचना पेश की । इसके उपरांत इन्होंने तराना पेश किया । कार्यक्रम के अंत में सुरेश ने एक मीरा भजन ‘‘आली मोरे नैनन ’’ पेश किया ।
इनके साथ मंच पर रोमान खां तबले पर और जाकिर धौलपुरी ने हारमोनियम पर बखूबी संगत की । कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर और विशेष अतिथि धनपत सिंह ने कलाकारों को सम्मानित किया ।


