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भगवान महादेव की भक्ति व आराधना के लिए उत्तम है श्रावण मास….

वैसे तो सभी महीनों में शिवजी की पूजा आराधना की जाती है परंतु श्रावण मास में की गई पूजा आराधना साधना आदि विशेष फलदाई होती हैं। श्रावण मास शिव जी को अति प्रिय है। श्रावण शब्द की उत्पत्ति श्रवण शब्द से हुई है, श्रवण का अर्थ है सुनना। श्रावण मास में ज्यादा से ज्यादा संतो के वचनों को सुनना चाहिए ,भागवत कथा या शिव महापुराण कथा का श्रवण करना चाहिए। इसके साथ-साथ श्रावण मास में भगवान महादेव को प्रसन्न करने के लिए महादेव की पूजा एवं आराधना करनी चाहिए। रुद्राभिषेक पूर्वक शिवजी की पूजा विशेष फल देने वाली होती है, जब समुद्र मंथन से विष निकला तो भगवान महादेव ने लोक- कल्याण के लिए विषपान कर लिया। उन्होंने इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया। तभी से भगवान महादेव को नीलकंठ कहने लगे। उस विषपान करने से महादेव को बहुत जलन तपन होने लगी तो उन्होंने हरिद्वार के पास एक सुंदर पहाड़ी का आश्रय लिया। यहां पर महादेव का नीलकंठ नामक शिवलिंग भी है। देवताओं ने महादेव का अभिषेक किया ,जिससे उनकी तपन जलन मिट गई। तभी से श्रावण मास में जलधारा लगाने से महादेव प्रसन्न होते हैं।

श्रावण मास की शिवरात्रि यानी श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भक्त कांवड़ लाकर भगवान महादेव का अभिषेक भी करते हैं । भगवती पार्वती ने शंकर भगवान को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तीज ( जिसे हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है ) के दिन शिवजी ने पार्वती को दर्शन दिए और पार्वती से विवाह करने का वचन भी दिया। इसलिए भी श्रावण मास शिव जी को अति प्रिय है। पंचामृत से शिवजी का अभिषेक करने से एवं गंगाजल तथा बेलपत्र द्वारा शिवजी की पूजा करने से महादेव अपने भक्तों की सभी कामनाओं को पूर्ण करते हैं। श्रावण मास में पड़ने वाले सोमवार या प्रदोष का व्रत करना श्रेष्ठ बताया गया है। कुमारी कन्याएं जिसके विवाह में तेरी हो रही है उन्हें अच्छे वर और घर की प्राप्ति के लिए सोमवार व प्रदोष के व्रत करने चाहिए तथा श्रावण मास में प्रतिदिन शंकर भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए। “ओम् नमः शिवाय ” इस पंचाक्षरी मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करें। ऐसा करने से महादेव अवश्य ही मनोकामना पूर्ण करते हैैं। श्रावण मास के व्रत-अनुष्ठान आदि आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हो जाते हैं। अबकी बार गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई को पड़ रही है। श्री खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर 28 डी चंडीगढ़ में भी शिव महापुराण की कथा का आयोजन 24 जुलाई से एक महीने के लिए किया जा रहा है। आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री जी प्रतिदिन शाम को 6:00 से 7:00 बजे तक कथा सुनाएंगे।