जय श्रीराम, मेरा नाम देवांशी शर्मा मैं सेक्टर 47c की निवासी हू। मैं एक युवा हूँ और मेरा मानना है कि समाज की सेवा और लोगों की मदद करने की भावना हमारे अंदर से आनी चाहिए…..
मेरी सामाजिक कार्यों में रुचि की शुरुआत मेरे परिवार से हुई है, खासकर मेरे पापा। पिछले कई वर्षों से मैं उन्हें अपने सेक्टर और आसपास के लोगों की मदद करते हुए देख रही हूँ। जब भी किसी व्यक्ति को कोई समस्या होती है—चाहे वह अस्पताल से जुड़ी हो, किसी व्यक्तिगत परेशानी से जुड़ी हो या किसी और तरह की समस्या हो—मेरे पापा अपनी तरफ से उसकी मदद करने और समाधान निकालने की पूरी कोशिश करते हैं।
मैंने उन्हें बचपन से लोगों की सेवा करते हुए देखा और उन्हीं को देखकर मेरे अंदर भी ये संस्कार आए हैं। मेरे लिए समाज सेवा केवल एक काम नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी और संस्कार का हिस्सा है।
मेरे पापा गौ माता और दूसरे पशु-पक्षियों की सेवा और देखभाल से भी जुड़े हुए हैं। मैंने उन्हें जानवरों की मदद और उनकी सुरक्षा के लिए काम करते हुए देखा है। इससे मैंने यह सीखा है कि समाज सेवा केवल इंसानों की मदद करने तक सीमित नहीं है। हमें अपने पर्यावरण, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
इसी सोच से मैंने भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेना शुरू किया है। मैं plantation drives में हिस्सा लेती हूँ और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने की कोशिश करती हूँ। मेरा मानना है कि आज लगाया गया एक पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ा योगदान हो सकता है।
मेरे पापा और मैं एक और काम साथ में करते हैं। कई बार सड़क के किनारे या पेड़ों के नीचे भगवान की तस्वीरें पड़ी हुई मिलती हैं। हम उन तस्वीरों को सम्मानपूर्वक वहाँ से उठाते हैं और अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका उचित निवारण और विसर्जन करते हैं। मेरे लिए यह केवल धार्मिक आस्था की बात नहीं है, बल्कि हमारे धर्म और हमारी भावनाओं का सम्मान करने की भी बात है।
College के समय में भी मैंने अलग-अलग सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया है। मैंने blood donation drive में भाग लिया और कई अन्य activities में भी जुड़ी रही, जहाँ मुझे लोगों के साथ काम करने, teamwork करने और समाज के लिए योगदान देने का अवसर मिला।
मेरा मानना है कि आज के युवाओं को भी ऐसी गतिविधियों में आगे आना चाहिए। युवा पीढ़ी के पास energy, ideas और नई सोच है। अगर हम अपनी energy को केवल अपने लिए इस्तेमाल करने के बजाय समाज, पर्यावरण, पशु-पक्षियों और अपनी संस्कृति के लिए भी लगाएँ, तो बहुत सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
हमें अपने धर्म और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए, लेकिन साथ ही अपने पर्यावरण की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। पेड़ लगाना, अपने आसपास सफाई रखना, पशु-पक्षियों की मदद करना और धार्मिक चीजों का सम्मान करना—ये छोटे कदम हैं, लेकिन इनसे समाज में एक बड़ी सोच पैदा हो सकती है।
मैं अभी युवा हूँ और मुझे बहुत कुछ सीखना है, लेकिन मैं चाहती हूँ कि सामाजिक सेवा मेरे जीवन का एक लगातार हिस्सा बनी रहे। मेरे पापा ने मुझे लोगों की मदद करने का महत्व अपने शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कामों से सिखाया है। अब मैं उन्हीं संस्कारों को अपनी सोच और अपने कामों के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहती हूँ।
**मेरा मानना है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े पद से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे अच्छे कामों से होती है। अगर आज का युवा एक पेड़ लगाए, किसी जरूरतमंद की मदद करे, किसी पशु की देखभाल करे और अपने धर्म, संस्कृति और पर्यावरण का सम्मान करे, तो हम मिलकर एक बेहतर और संस्कारवान समाज बना सकते हैं। धन्यवाद।”**
“Young generation sirf future nahi hai — hum present mein bhi apne community ke liye kuch kar sakte hain.”


