बुजुर्गों से गुंडागर्दी, धक्के मारे, मेयर शाम लाल बंसल दें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा : मनोज अग्रवाल…
पंचकूला। सेक्टर-27 स्थित करीब ₹12 करोड़ की लागत से बने वृद्धाश्रम से बुजुर्गों को कथित रूप से धक्के देकर बाहर निकाले जाने के मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं पंचकूला शहरी जिलाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर नगर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि प्रशासनिक और ठेके संबंधी विवाद का खामियाजा असहाय बुजुर्गों को भुगतना पड़े, यह किसी भी सभ्य व्यवस्था के लिए शर्मनाक स्थिति है।
अग्रवाल ने कहा कि यदि संचालक संस्था के साथ अनुबंध को लेकर कोई विवाद था या नियमों के उल्लंघन के आरोप थे तो उसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन क्या नगर निगम ने पहले यह सुनिश्चित किया कि हर बुजुर्ग को सुरक्षित वैकल्पिक आश्रय, भोजन, दवाइयां, चिकित्सा सुविधा और देखभाल मिलेगी? अगर नहीं, तो कार्रवाई की जल्दबाजी पर जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के साथ निगम अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा धक्केशाही की शिकायतें सामने आना बेहद गंभीर विषय है। जिन लोगों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में सहारे और सम्मान की जरूरत है, उन्हें इस तरह असुरक्षित स्थिति में छोड़ना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम के निर्वाचित मुखिया होने के नाते मेयर श्याम लाल बंसल इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उनकी मोजूदगी में निगम अधिकारियों की द्वारा बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और जबरन बाहर निकालने की कार्रवाई हुई है तो मेयर को जनता के सामने जवाब देना चाहिए। अग्रवाल ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मेयर श्याम लाल बंसल से इस्तीफा देने की मांग की।
उन्होंने सवाल किया कि ₹12 करोड़ की लागत से वृद्धाश्रम बनाया गया था बुजुर्गों को आश्रय देने के लिए या फिर विवाद होते ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने के लिए? सरकार और निगम बुजुर्गों के सम्मान और कल्याण की बातें करते हैं, लेकिन जमीन पर यदि बीमार और असहाय बुजुर्गों को ही दर-दर भटकना पड़े तो इन दावों का क्या अर्थ रह जाता है?
अग्रवाल ने मांग की कि निगम तत्काल सार्वजनिक करे कि विस्थापित प्रत्येक बुजुर्ग इस समय कहां है, उसकी चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था कौन कर रहा है, उसे कितने समय के लिए वैकल्पिक आश्रय दिया गया है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसी प्रशासनिक विवाद के नाम पर एक भी बुजुर्ग को सड़क पर या असुरक्षित स्थिति में छोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। पहले बुजुर्गों की सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था हो, उसके बाद ही कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।


