ग्लो बल आर्ट क्रिएशंस ने की प्रभावशाली पंजाबी फीचर फिल्म ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ की घोषणा….
पंजाब, भारत — ग्लो बल आर्ट क्रिएशंस (Glow Bal Art Creations) ने आधिकारिक तौर पर अपनी बहुप्रतीक्षित तीसरी फीचरj फिल्म ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ की घोषणा कर दी है। यह फिल्म एक बेहद प्रभावशाली और सामाजिक रूप से प्रासंगिक ड्रामा होने का वादा करती है, जो हमारे सिस्टम की कमियों, प्रशासनिक उपेक्षा और आम नागरिकों को चुकानी पड़ने वाली भारी कीमत पर तीखा कटाक्ष करती है।
इस फिल्म के निर्माता इंद्रजीत बल हैं और कहानी व संवाद प्रसिद्ध लेखक डॉ. मनजीत सिंह बल द्वारा लिखे गए हैं। इस प्रोजेक्ट की कमान सुलझे हुए निर्देशक सोम सहोता के हाथों में है, जिन्होंने फिल्म की पटकथा (स्क्रीनप्ले) भी तैयार की है। वह कई फिल्मों में निर्देशन और अभिनय का एक लंबा और गहरा अनुभव रखते हैं।
‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ एक ऐसी सनसनीखेज कहानी है जो मेडिकल, प्रशासनिक और सामाजिक संकटों को बहुत ही खूबसूरती से आपस में जोड़ती है। फिल्म की कहानी एक बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस कांस्टेबल के दुखांत पर केंद्रित है। दिल की बीमारी के स्पष्ट और गंभीर लक्षण होने के बावजूद, उसे बेरहमी से मेडिकल छुट्टी देने से इनकार कर दिया जाता है। इसके बजाय, उसे एक राजनेता के स्वागत और सलामी के लिए ड्यूटी पर खड़े रहने, इंतजार करने और सलाम करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह मर्मस्पर्शी कहानी मानव जीवन और जनसेवा के ऊपर राजनीतिक चापलूसी के विनाशकारी परिणामों को बेनकाब करती है। शानदार कलाकार और रचनात्मक टीम के साथ फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में गुलशन सोनी, गुरविंदर सिंह भरपूर सिंह, अनुराधा शर्मा, आरती बेदी, कुलदीप काजल, लाभ सिंह लेहली, जोरा बल, बलदेव सनौरी, किशोर शर्मा, दर्शन तेहोना, रमेश अनेजा, पी. पी. सिंह, अश्वनी शर्मा। उनका साथ देने के लिए एक बेहतरीन सह-कलाकार टीम मौजूद है और मेहमान कलाकार पंजाब के मशहूर एक्टर बी. एन. शर्मा कहानी में भावनात्मक गहराई लाने के लिए बाल कलाकार सिमरन सहोता, उम्मीद बल, गुलाब बल भी अहम भूमिकाओं में हैं। कैमरे के पीछे भी फिल्म में उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं: डी.ओ.पी. (DOP): दयाल किशन, संगीत: याकूब गिल माझे वाला, जो एक ऐसा रूहानी और प्रभावशाली संगीत दे रहे है। फिल्म की शूटिंग इस समय पंजाब के सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से समृद्ध इलाकों में हुई है। कुछ समय के बाद ये फिल्म दर्शकों को देखने को मिलेगी ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज का वह आईना साबित होगी जो दुनिया भर के दर्शकों के बीच एक गहरी सोच बहस और भावनात्मक जुड़ाव पैदा करेगी।


