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चंडीगढ़ की लेखिका डॉ. साज़ीना खान की नई कविता पुस्तक ‘शी वॉक्ड एनीवे’ का हुआ लोकार्पण…..

चंडीगढ़, 3 अगस्त, 2026: चंडीगढ़ में जन्मीं प्रसिद्ध लेखिका और कवयित्री डॉ. साज़ीना खान ने अपनी नई कविता पुस्तक ‘शी वॉक्ड एनीवे’ का लोकार्पण नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में किया। इस कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच और कला जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया और महिलाओं, यादों, आत्मनिर्भरता तथा आत्मविकास जैसे विषयों पर विचार साझा किए।

डॉ. साज़ीना खान की यह नई पुस्तक उनके साहित्यिक सफर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पाठकों ने इस पुस्तक को काफी पसंद किया है और यह अमेज़न की तीन अलग-अलग श्रेणियों में पहले स्थान पर पहुंच चुकी है।

कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश मुख्य अतिथि रहे। “वॉकिंग थ्रू स्टॉर्म्स: विमेन, मेमोरी एंड द मेकिंग ऑफ द इनर सेल्फ” विषय पर आयोजित चर्चा में डिजाइनर, क्यूरेटर और थिएटर कलाकार ओरून दास तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध निर्देशक और कोरियोग्राफर डॉ. गिल्स चुएन शामिल हुए। इस चर्चा का संचालन लेखिका और सामाजिक विकास क्षेत्र की विशेषज्ञ मीरा खन्ना ने किया।

‘शी वॉक्ड एनीवे’ में हिम्मत, पहचान, दुख, उपचार और आत्मखोज जैसे विषयों को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। ‘अनअनाउंस्ड बिकमिंग’, ‘परमिशनलेस’, ‘ग्रेस, अनरिक्वेस्टेड’ और ‘आई डिडन्ट आस्क फॉर लाइट’ जैसी कविताओं में आगे बढ़ते रहने को जीवन में साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया गया है।

अपनी पुस्तक के बारे में डॉ. साज़ीना खान ने कहा, “हर बार आगे बढ़ना जोरदार विरोध करना नहीं होता। कई बार इसका मतलब सिर्फ खुद को खोने से इंकार करना होता है। यह लगातार आगे बढ़ते रहने का फैसला है, चाहे दुनिया आपकी मंजूरी दे या नहीं। ये कविताएं उस एहसास को व्यक्त करती हैं, जहां संवेदनशीलता कमजोरी नहीं बनती, दुख सम्मान को खत्म नहीं करता और संघर्ष धीरे-धीरे आत्मविश्वास में बदल जाता है।”

डॉ. खान ने बताया कि यह पुस्तक उन्होंने अपनी बेटी दनीन के लिए एक विशेष उपहार के रूप में लिखी है। यह केवल एक निजी भावना नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचने वाला संदेश भी है, जो पाठकों को उम्मीद, हिम्मत और जीवन की चुनौतियों के बीच अपने रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि कविता किस तरह यादों को संजोती है, हमारी पहचान को मजबूत बनाती है और बिना शोर किए साहस की आवाज बनती है। साथ ही आज के समय में समानता और आत्मनिर्भरता के बदलते अर्थों पर भी विचार किया गया। ओरून दास और डॉ. गिल्स चुएन ने ‘आई डिडन्ट आस्क फॉर लाइट’ की प्रभावशाली मंच प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

‘शी वॉक्ड एनीवे’ की सफलता ने डॉ. साज़ीना खान को एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय लेखिका और कवयित्री के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई है, जिनकी रचनाएं उपचार, हिम्मत और मानवीय गरिमा जैसे विषयों के कारण दुनिया भर के पाठकों से जुड़ती हैं।

इस पुस्तक का लोकार्पण चंडीगढ़ की इस प्रतिभाशाली लेखिका की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा, जिनकी साहित्यिक रचनाओं को देश और विदेश में लगातार सराहना मिल रही है।