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विद्यालयी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की शिक्षा का आधार : डॉ. ऋषि पाल….

चंडीगढ़। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, घड़ुआँ (पंजाब) के सह-प्राध्यापक डॉ. ऋषि पाल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक का युग है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) आधुनिक विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। विद्यालयी शिक्षा में एआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को अनेक लाभ मिल रहे हैं। एआई शिक्षा को अधिक प्रभावी, रोचक, गुणवत्तापूर्ण तथा विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता और गति अलग-अलग होती है। एआई आधारित तकनीक विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप अध्ययन सामग्री और अभ्यास उपलब्ध कराती है, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बनती है। यह विद्यार्थियों की प्रगति का विश्लेषण कर उनके स्तर के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराती है। साथ ही उत्तर-पुस्तिकाओं का त्वरित एवं सटीक मूल्यांकन, स्मार्ट चैटबॉट, वर्चुअल ट्यूटर तथा शैक्षिक एप्लिकेशन विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का तत्काल समाधान कर उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

डॉ. ऋषि पाल ने बताया कि एआई शिक्षकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। यह पाठ योजना तैयार करने, विद्यार्थियों की प्रगति का विश्लेषण करने तथा प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए भी एआई आधारित तकनीक शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बना रही है।

उन्होंने कहा कि एआई के अनेक लाभ होने के बावजूद कुछ चुनौतियाँ भी हैं। सभी विद्यालयों में आधुनिक तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की कमी, एआई पर अत्यधिक निर्भरता, डेटा गोपनीयता तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषय गंभीर चिंता का विषय हैं। इसलिए एआई का उपयोग जिम्मेदारी, नैतिकता और संतुलित दृष्टिकोण के साथ किया जाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई कभी भी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता, बल्कि वह केवल शिक्षकों का सहयोगी बन सकता है।

डॉ. ऋषि पाल ने कहा कि आने वाले समय में एआई शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बन जाएगा। स्मार्ट कक्षाएँ, वर्चुअल प्रयोगशालाएँ, व्यक्तिगत शिक्षण तथा स्वचालित मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएँ शिक्षा को अधिक आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समावेशी बनाएंगी। यदि एआई का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए तो यह न केवल शिक्षा के स्तर को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मकता, तार्किक सोच और मानवीय मूल्यों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।