जंतर-मंतर पर उमड़ा देश भर के युवाओं का सैलाब; ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर ‘युवा महापंचायत’ ने फूँका आंदोलन का बिगुल….
नई दिल्ली: आज राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ आर्गेनाईजेशन (AIDYO) के तत्वावधान में आयोजित एक विशाल ‘युवा महापंचायत’ में देश के कोने-कोने से आए सैंकड़ों युवाओं और जागरूक नागरिकों ने हिस्सा लिया। यह महापंचायत भारतीय नवजागरण के महान मनीषी व समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जन्म वार्षिकी के अवसर पर आयोजित की गई, जिसमें बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी समस्याओं के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया गया।
शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के प्रख्यात वक्ताओं ने महापंचायत को संबोधित करते हुए केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए।
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. अतुल सूद (जेएनयू) ने कहा कि एक तरफ सरकारें रोज़गार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ रही है वहीं दूसरी ओर शिक्षा नीतियों के माध्यम से, छोटी उम्र से ही छात्रों, युवाओं में सवाल करने की प्रवृत्ति को ही खत्म कर रही है। नतीजतन, आंदोलन खड़ा करना तो दूर की बात, समाज में अन्याय के खिलाफ चर्चा का माहौल भी नहीं बचा है। श्रमिकों के जनवादी अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, हाल में आए लेबर कोड इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसी कड़ी में, प्रो. नंदिता नारायण (पूर्व अध्यक्ष, DUTA) ने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद पड़े हैं, देश भर में लाखों लाख पद खाली हैं, उन्हें भरा नहीं जा रहा है। आज, निजीकरण के इस दौर में स्थाई नौकरी का स्थान पूरी तरह कॉन्ट्रैक्चुएलिजेशन की प्रक्रिया ले चुकी है। आवेदक परीक्षाओं की लिए फॉर्म भरते हैं, लेकिन परीक्षाएं इस अनुपात में रद्द होती हैं कि युवाओं की उम्र निकल जाती है। PhD करने के बावजूद रोज़गार नहीं मिल रहा है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अमरजीत कुमार (महासचिव, AIDYO) ने कहा कि बेरोजगारी आज केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी बन चुकी है। निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा ने सुरक्षित रोजगार की अवधारणा को ही खत्म कर दिया है। सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी और रोजगार को नीति के केंद्र में लाना होगा। आज युवाओं को धर्म और जाति के नाम पर भटकाने की साजिश हो रही है ताकि वे अपने वास्तविक मुद्दों—रोटी, कपड़ा और रोजगार—पर बात न कर सकें। आज हमारा समाज एक गंभीर संकट के दौर से गुज़र रहा है। ऐसे समय में ज्योतिबा फुले, ईश्वरचंद्र विद्यासागर आदि जैसे नवजागरण काल के मनीषियों तथा भगत सिंह, नेताजी सुभाष बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, प्रीतिलता वादेदार जैसे आज़ादी आंदोलन के क्रांतिकारियों के जीवन संघर्ष से सीख लेते हुए एक जुझारू आंदोलन को गठित करना होगा।
विभिन्न राज्यों से आए युवा नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह महापंचायत युवाओं की सोई हुई चेतना को जगाने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए संगठित करने की कड़ी में मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश मोहंता (अखिल भारतीय सचिवमंडल सदस्य, AIDYO) ने की।
महापंचायत के दौरान एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें देश की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
महापंचायत का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ज्योतिबा फुले और महान क्रांतिकारियों के आदर्शों पर चलते हुए, युवा वर्ग एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण तक अपना संघर्ष जारी रखेगा।
जारीकर्ता:
कुलदीप सिंह (अखिल भारतीय सचिवमंडल सदस्य, AIDYO)
3A/38, WEA, करोल बाग, नई दिल्ली
संपर्क: 9434963650


