चंडीगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग का हाल — जुलाई 2025 से नहीं बढ़ा गेस्ट/कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों का महंगाई भत्ता….
चंडीगढ़:- चंडीगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत गेस्ट एवं कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों का महंगाई भत्ता जुलाई 2025 से अब तक जारी नहीं किया गया है। पिछले आठ महीनों से महंगाई भत्ते की फाइल शिक्षा विभाग में एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रही है, जिससे लगभग 500 शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञात हो कि कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली के अद्यतन स्वरूप के रूप में गेस्ट शिक्षक वर्ष 2008 से तथा डायरेक्ट कॉन्ट्रैक्ट के नाम से शिक्षक वर्ष 1999 से नियमित पदों पर कार्य कर रहे हैं। माननीय न्यायालय एवं प्रशासनिक आदेशों के अनुसार इन्हें नियमित शिक्षकों की भांति बेसिक वेतन के साथ महंगाई भत्ता दिया जाता है। इसके बावजूद प्रत्येक बार महंगाई भत्ता जारी करने में अनावश्यक देरी की जाती है। विभाग की अकाउंट्स शाखा द्वारा बार-बार आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया को लंबित रखा जाता है, जिसकी शिकायत गृह मंत्रालय तक की जा चुकी है।
चंडीगढ़ प्रशासन के कार्मिक विभाग द्वारा वर्ष 2016 में आदेश जारी किया गया था कि सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की भांति महंगाई भत्ता दिया जाएगा। साथ ही वित्त विभाग द्वारा भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गेस्ट शिक्षकों के महंगाई भत्ते की फाइल बार-बार भेजने की आवश्यकता नहीं है; नियमित कर्मचारियों के साथ ही उनका भत्ता जारी किया जाए।
वहीं उच्च शिक्षा विभाग में सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता दिया जा रहा है तथा सातवां वेतन आयोग भी लागू किया जा चुका है। जबकि दोनों विभागों की सचिव एक ही होने के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग इस मामले में पीछे दिखाई देता है। इसका मुख्य कारण आपसी तालमेल की कमी, अनावश्यक अवरोध तथा कार्य में रुचि का अभाव बताया जा रहा है, जिसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
इस मुद्दे को लेकर ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स की 30 जनवरी 2026 को स्कूल शिक्षा निदेशक के साथ विशेष बैठक हुई थी, जिसमें निदेशक महोदय ने आश्वासन दिया था कि सर्व शिक्षा अभियान के शिक्षकों का महंगाई भत्ता जारी हो चुका है और शीघ्र ही गेस्ट/कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों का भत्ता भी जारी कर दिया जाएगा। परंतु लंबे समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे शिक्षकों में रोष बढ़ता जा रहा है।
यूनियन के महासचिव शिवमूरत यादव ने कहा कि हर बार ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से शिक्षकों की ऊर्जा अनावश्यक विरोध प्रदर्शनों में व्यर्थ होती है, जब एक बार वित्त विभाग चंडीगढ़ प्रशासन ने कह दिया की उनके पास फाइल भेजने की जरूरत नहीं, 55% तक के सब महंगाई भत्ते इन्हीं अकाउंट्स वालों के द्वारा वेरिफाई कर के जारी किए गए है,तो फिर से वही बात दोहरानी अन्याय है,यदि शीघ्र महंगाई भत्ता जारी नहीं किया गया तो शिक्षकों को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी। आवश्यकता पड़ने पर उन अधिकारियों के आवास के समक्ष भी प्रदर्शन किए जाएंगे जो इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
यूनियन के प्रधान रणबीर राणा ने कहा कि परीक्षाओं का समय होने के कारण शिक्षक आंदोलन नहीं करना चाहते, परंतु चंडीगढ़ प्रशासन का वित्त विभाग की उदासीनता के कारण उनके पास कोई विकल्प शेष नहीं रहेगा। उन्होंने मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव तथा निदेशक शिक्षा विभाग से अपेक्षा जताई कि वे शीघ्र गेस्ट/कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ते का आदेश जारी करेंगे और चंडीगढ़ के शिक्षकों के अन्य मांगे जो लंबित है उन पर कार्यवाही करेंगे, अन्यथा हम सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे, हम चंडीगढ़ प्रशासक से मांग करते है की ऐसे अफसरों से तुरंत प्रभाव से उनके विभाग वापिस लिए जो कि शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में असमर्थ है।
शिवमूरत यादव
महासचिव
ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स, यूटी चंडीगढ़ (रजिस्टर्ड)
मोबाइल: 7696280841


