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मधुर गायन और मनमोहक भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का उद्घाटन दिवस टैगोर थिएटर में अत्यंत गरिमामय ढंग से संपन्न….

बहुप्रतीक्षित 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का शुभारंभ आज यहां टैगोर थिएटर में खूबसूरत संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ। भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और प्रसार के उद्देश्य से आयोजित यह तीन दिवसीय महोत्सव क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर केंद्र की वार्षिक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।

औपचारिक समारोह के उपरांत कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गायिका इंद्राणी मुखर्जी की उत्कृष्ट गायन प्रस्तुति से हुई। उन्होंने राग यमन में विलंबित लय की एकताल बंदिश “दरिया पार करो मेरी नैया” प्रस्तुत की, जिसके बाद द्रुत तीनताल में “थुमक थुमक गोपियां संग” की मधुर और भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने खमाज में होरी ठुमरी “ना मानूंगी लाल तोरी बिनती” प्रस्तुत की। अंत में उन्होंने राग किरवानी में दादरा “परी गइला नहरवा में दाग” प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति का समापन किया। उनकी मधुर गायकी ने ट्राइसिटी के संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खान और हारमोनियम पर पंडित विनय कुमार मिश्रा ने शानदार संगत की।

इसके पश्चात विद्या सुब्रमण्यम ने मंच संभालते हुए भरतनाट्यम की अद्भुत प्रस्तुति “डमरू ड्यूलिटी” प्रस्तुत की। डमरू अपने स्वरूप में पुरुष और प्रकृति के बीच ऊर्जा के प्रवाह का प्रतीक है। इसी में नाद की उत्पत्ति निहित है, जो सृष्टि और गति का मूल स्रोत है। स्वयं सहित आठ नर्तकों के समूह के साथ प्रस्तुत इस रचना में ब्रह्मांड और मानव जीवन में मौजूद द्वैत—ध्वनि और मौन, स्थिरता और गति, सृजन और विलय, पुरुष और स्त्री, मिलन और वियोग—को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया। “हममें से प्रत्येक के भीतर वही द्वैत विद्यमान है जो पूरे ब्रह्मांड में है।”

सम्मेलन के दूसरे दिन प्रसिद्ध सितार वादक पंडित पूर्वायन चटर्जी तथा गुरु शर्मिला दास द्वारा ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति

दी जाएगी।