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आप ने केंद्रीय बजट 2026–27 के प्रत्यक्ष कर प्रावधानों की आलोचना की: “सतही बदलाव, करदाताओं को वास्तविक राहत नहीं…..

वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किये गए बजट भाषण के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रेम गर्ग ने केंद्रीय बजट 2026–27 के प्रत्यक्ष कर प्रावधानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

गर्ग ने कहा कि इस बार करदाताओं को वास्तविक राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बजट ने केवल प्रक्रिया-संबंधी सुधार दिए हैं, जबकि मध्यम वर्ग और सामान्य टैक्सपेयर के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई है।

नया आयकर कानून लागू, लेकिन टैक्स दरों में कोई कटौती नहीं

वित्त मंत्री ने घोषणा की कि Income Tax Act, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जो पुराना छह दशकों पुराना कर कानून बदल देगा। हालांकि इसे सरलीकरण और मुकदमेबाज़ी कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया, गर्ग ने कहा कि इससे टैक्स दरों में कोई कटौती नहीं होती और आम करदाता को वास्तविक लाभ नहीं मिलता। 

टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, मानक छूट अपरिवर्तित

बजट में व्यक्तिगत आय-कर स्लैब में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया और सैलरीभोगी करदाताओं के लिए मानक कटौती भी स्थिर रखी गई है।  गर्ग ने कहा, “*टैक्स स्लैब और छूट सीमा में बदलाव न होने से मध्यम वर्ग को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा।”*

प्रक्रियागत राहत वास्तविक बोझ कम नहीं करती

बजट में छोटे करदाताओं के लिए nil-deduction certificates और ITR फाइलिंग के लिए बढ़ी हुई समय सीमा जैसी सुविधा दी गई है, लेकिन गर्ग ने कहा कि ये उपाय करदाताओं के वास्तविक टैक्स बोझ को कम नहीं करते। 

निशुल्क छूट और विशिष्ट प्रावधान अपर्याप्त

बजट में मोटर दुर्घटना दावा ब्याज पर कर-मुक्ति और कुछ गैर-निवासी कर प्रावधानों की राहत जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, किंतु गर्ग ने कहा कि इनसे व्यापक करदाता समस्याओं का समाधान नहीं होता। 

समान और वास्तविक कर सुधार की माँग

गर्ग ने निष्कर्ष निकाला: “प्रत्यक्ष कर सुधार तभी सार्थक होंगे जब वे करदाताओं पर वास्तविक बोझ को कम करें, छोटे टैक्सपेयर को सशक्त बनाएं और कर व्यवस्था में निष्पक्षता लाएँ। इस बजट में यह मौका था, लेकिन वित्त मंत्री केवल सतही बदलाव ही ला पाए।”