जहाँ रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का हुआ संगम: कला फ्यूज़न की तीन दिवसीय आर्ट प्रदर्शनी शुरू…
चंडीगढ़, 9 जनवरी 2026: पंजाब कला भवन, सेक्टर-16, चंडीगढ़ में शुक्रवार से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय आर्ट एंड क्राफ्ट एग्जीबिशन ने शहर के कला प्रेमियों को समकालीन रचनात्मकता से रूबरू कराया। कला फ्यूज़न द्वारा सोशल सब्स्टेंस के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में 50 से अधिक कलाकारों ने भाग ले रहे हैं जिन्होंने अपनी अनूठी कलात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से दर्शकों को एक समृद्ध दृश्यात्मक अनुभव प्रदान किया।
इस अवसर पर आयोजित आर्ट एंड क्राफ्ट एग्जीबिशन का उद्घाटन मुख्य अतिथि रविंदर शर्मा ने किया, जो एक प्रख्यात कलाकार, कला इतिहासकार एवं कला शिक्षाविद व चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के वाईस चेयरमैन भी हैं। एग्जीबिशन में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में लोकप्रिय लेखिका, ब्लॉगर एवं आर्टिस्ट रीना चोपड़ा उपस्थित रहीं, जबकि विशेष अतिथि के रूप में प्रसिद्ध विज़ुअल फ़ोटोग्राफ़र एवं पंजाब ललित कला अकादमी के प्रेजिडेंट गुरदीप धीमान ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
इस लाइव आर्ट्स आयोजन में नेहा भल्ला सूद, पूजा गर्ग, रोहन रियाउ, किरपाल ओसाहन, मनीषा भटनागर, डॉ. मेघना वालिया, रितु सोंध, रमीता चावला, नैना शर्मा, अनुराधा सागर, मॉर्फियस नाग, श्रेया (इना), इशिता, सोनम शर्मा, फ़िज़ा अरोड़ा, सोनिया डोगरा, मेघा सक्सेना, अनुलेखा सिंह, मंजू, रीना चोपड़ा, मनीत कौर, समृति गोयल, ईशा धीमान, डॉ. सिमरनजोत कौर, अर्शलीन कौर, नेहा कंसल, तवलीन कौर, मनीष कुमार मीणा, योगिता चौहान, गुनीत कौर, प्रिया शर्मा, नेहा कौशिक, अमृता कालरा, मीनाक्षी ठुकराल, प्राची मिन्हास, पल्लवी, उधम सिंह बराड़, अरुण बंसल, पुनीत मदान, जसबीर कौर, रीता सिकंद, हरशरणजीत सिंह, बच्चितर सिंह, डॉ. पुष्पिंदर कौर, रीता तूर, डॉ. सुनीत,माही गोविंद सिंह, माहीना, सोनी, सृष्टि, सुरेन्द्रा कौर गिल और सुरेंद्र कुमार जैसे नामी आर्टिस्ट्स ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी में कला के कई अलग-अलग रूप और तकनीकें देखने को मिलीं। ऐक्रेलिक, ऑयल और वॉटरकलर पेंटिंग्स के माध्यम से कलाकारों ने रंगों और भावनाओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। वहीं डिजिटल आर्टवर्क, मिनी कैनवास पेंटिंग और अल्कोहल इंक आर्ट ने आधुनिक और नए प्रयोगों को दर्शाया। मूर्तिकला और स्कल्प्चर आर्ट ने त्रि-आयामी कला के माध्यम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया, जबकि रेज़िन आर्टवर्क, कोस्टर्स और कैंडल आर्ट में रोज़मर्रा की चीज़ों को कलात्मक रूप दिया गया।
इसके साथ ही क्रोशे आर्ट, लिप्पन आर्ट, मंडला आर्ट, पेंटेड स्टोन्स, पेंटेड बोतलें और पेंटेड प्लांटर्स ने पारंपरिक और लोक कलाओं को आधुनिक सोच के साथ प्रस्तुत किया। मिनी प्लांटर्स और हैंडमेड डेकोर आर्ट में प्रकृति और कला का सुंदर मेल देखने को मिला, जिससे प्रदर्शनी में हस्तशिल्प और फाइन आर्ट का आकर्षक संगम दिखाई दिया।
प्रदर्शनी की आयोजक नेहा भल्ला सूद, जो कला के प्रति गहरी रुचि रखने वाली एक समर्पित कलाकार भी हैं, के अनुसार, कला उनके लिए ध्यान और तनाव से मुक्ति का माध्यम है। वे रोज़मर्रा की साधारण वस्तुओं जैसे कांच की बोतलें, कुल्हड़, पत्थर, लकड़ी और सिरेमिक को कला में बदलने के लिए जानी जाती हैं। कैनवास और कागज़ के साथ-साथ नए और अलग माध्यमों पर प्रयोग करना उनकी कला की विशेष पहचान है। उन्होने बताया कि कला फ्यूज़न और सोशल सब्स्टेंस की यह साझेदारी केवल कला के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह रचनात्मक संवाद, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक सहभागिता को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बनी।
आयोजक रोहन रियाउ—जो एक कंटेम्पररी विसुअल आर्टिस्ट और फिल्ममेकर हैं—ने बताया कि उनके लिए यह प्रदर्शनी रचनात्मक स्वतंत्रता और सहज अभिव्यक्ति का उत्सव रही। उन्होंने कहा कि जिस तरह उनकी अपनी कला भावनाओं, गति और प्रकृति से प्रेरित होकर स्वतः आकार लेती है, उसी तरह यह मंच भी कलाकारों को बिना किसी बंधन के अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। प्रकृति और वन्यजीवन से गहराई से प्रभावित रोहन के कहा कि यह आयोजन उभरते और स्थापित कलाकारों—दोनों के लिए एक ऐसा साझा मंच बना, जहाँ वे अपने कार्य के माध्यम से दर्शकों से जुड़ सके और अपनी पहचान को और मजबूत कर सके।
वहीं सह-आयोजक पूजा गर्ग—जो चंडीगढ़ स्थित एक बहुआयामी कलाकार हैं और ऑयल, ऐक्रेलिक, वॉटरकलर, चारकोल और मिक्स्ड मीडिया जैसे विभिन्न माध्यमों में कार्य करती हैं—ने कहा कि यह प्रदर्शनी कलात्मक विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समर्पित रही। उनके अनुसार, हर कलाकार की अपनी अलग सोच, शैली और कहानी होती है, और यह मंच उन कहानियों को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ सामने लाने का माध्यम बना। पूजा ने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत कृतियाँ मानवीय अनुभवों के अनकहे और गहरे भावों को दर्शाती रहीं, जिससे दर्शकों को रुककर देखने, सोचने और स्वयं से जुड़ने का अवसर मिला।
नेहा ने बताया कि यह आयोजन केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं रहा, बल्कि कलाकारों, दर्शकों और समाज के बीच संवाद स्थापित करने की एक सशक्त पहल साबित हुआ, जिसने उभरते और स्थापित कलाकारों—दोनों को समान रूप से आगे बढ़ने और अपनी रचनात्मक पहचान को विस्तार देने का अवसर प्रदान किया।
11 जनवरी तक आयोजित इस प्रदर्शनी के दौरान कलाकारों से संवाद, इंटरएक्टिव सत्र और निर्देशित भ्रमण ने दर्शकों, विद्यार्थियों और कला शोधकर्ताओं को सीखने और समझने का अवसर प्रदान किया।


