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प्राचीन कला केंद्र सेक्टर 35 में संस्कार भारती चंडीगढ़ ईकाई की मासिक काव्य गोष्ठी की श्रंखला की 101 वीं गोष्ठी पर साहित्यिक अमृतोत्सव का भव्य आयोजन…

चंडीगढ़: आज प्राचीन कला केंद्र सेक्टर 35 में संस्कार भारती चंडीगढ़ ईकाई की मासिक काव्य गोष्ठी की श्रंखला की 101 वीं गोष्ठी पर साहित्यिक अमृतोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर ट्राइसिटी के कवियों के साझा संकलन का विमोचन किया गया। संस्कार भारती के मार्गदर्शक प्रो. सौभाग्य वर्धन ने बताया कि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लविश चावला, प्रांत महामंत्री, संस्कार भारती, पंजाब और डा. अनीश गर्ग, वाइस चेयरमैन, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर चमनलाल चमन ने की और मंच संचालन डा मंजू चौहान ने विद्वतापूर्ण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्येय गीत से किया। सर्वप्रथम राजेश आत्रेय ने देशभक्ति का परिचय देते हुए कहा,”मेरे वतन की शान है, फैली फिज़ाओं में, फहरा रहा है अब तिरंगा, हर दिशाओं में”, डा निशा भार्गव ने नारी को जागरण का संदेश देते हुए कहा,”तूम चाहो तो लड़ सकते हो, तुम चाहो तो कर सकते हो”, वरिष्ठ कवि प्रेम विज ने पढ़ा,”अगर दुनिया वालों मुहब्बत न होती, किसी को किसी की जरूरत न होती”, डा. अनीश गर्ग ने प्रेम का अद्भुत रंग बिखेरते हुए कहा,”प्रिय, प्रेम में रिक्तता कहां है, प्रेम में शून्यता कहां है, जो शून्य प्रतीत होता है वही तुम्हारा अनंत रूप है”, डा त्रिपत मेहता ने कहा,”नैन चक्षुओं को खुलना सिखा मौला, ज़र्रे ज़र्रे में तेरा अक्स को देखना सिखा मौला”, आशुतोष महाजन ने कहा,”हुआ क्या हाल तुम्हारा, कभी गैरों ने लूटा तुमको”, वरिष्ठ शायर सुशील हसरत नरेलवी ने तालियां बटोरते हुए कहा,”कैसी एहसास की जंग है ज़िंदगी, अनबुझी प्यास का अंग है ज़िंदगी”, डा प्रज्ञा शारदा ने रिश्तों पर तंज़ रखते हुए पढ़ा,”नाज़ बहुत था जिन रिश्तों पर, सब के सब नापाक वो निकले”, गौतमी एम ने कहा ,”मैं प्रेम के सूरज को छूने गई दूर कभी, लौटी तो कहा गया यह तो छलावा थी अभी”, सरिता मलिक ने कहा,” मुझे खारे पानियों से गुजरता हुआ तो देख, लड़खड़ा के मुझको संभलता हुआ तो देख”, गुरमीत गोल्डी ने सुबह की चाय पर खूबसूरत कविता रखी।

हास्य कवि अनवर अंसारी ने पुरूषों में नीले ड्रम के भय को कटाक्ष रखते हुए कहा,”लव मैरिज करने पर मिलता है युवकों को अब नीला ड्रम, अरेंज मैरिज में हनीमून पर जाओ तो धक्का दिया और काम खत्म”, शीनू वालिया धरा ने कहा,”प्यार है तो इज़हार भी हो ज़रूरी तो नहीं, हमराह हमख्याल भी हो तो जरूरी तो नहीं”, राजन तेजी सुदामा ने पढ़ा,”दोस्ती के फर्ज करो ऐसे निभाना चाहिए, द्वंद जब हो दोस्त से तो हार जाना चाहिए”। इस गोष्ठी में डा निर्मल सूद, श्याम सखा श्याम, नीलम नारंग, सुमन, सुखविंदर पठानिया, सर्वेश शायर, कंवलजीत कंवल, तिलक सेठी, परमिंदर सिंह प्रेम ने अपनी दमदार प्रस्तुति दी। संस्कार भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष यशपाल कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।