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नेशनल सिल्क एक्सपो-वेडिंग स्पेशल का चंडीगढ़ के हिमाचल भवन में हुआ शुभारम्भ…

ग्रामीण हस्तकला विकास समिति के तत्वावधान में आज शुरू हुए “ वेडिंग सीज़न स्पेशल “नेशनल सिल्क एक्सपो का आयोजन चण्डीगढ के सेक्टर-28 बी स्थित हिमाचल भवन में किया जा रहा है जोकि 19 से 24 नवम्बर तक खुला है और यहाँ आपके लिए सर्दी और शादियों के इस मौसम के लिये खास सिल्क व कॉटन की हैण्डलूम साड़ियों की लेटेस्ट वैरायटी, नये डिजाइन की साड़ियों की व्यापक रेंज उपलब्ध है। साड़ियों के साथ-साथ ड्रेस मेटेरियल और फैशन ज्वैलरी का लुभावना कलेक्शन भी यहां रखा गया हैं। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेराइटी लोगों के लिए खरीदारी का एक शानदार अवसर है।।

इस विशेष आयोजन में देशभर के अलग-अलग राज्यों : कश्मीर, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश राजस्थान के 80 से भी ज्यादा श्रेष्ठ बुनकर उनके द्वारा खुद तैयार सिल्क की साड़ियों का लुभावना कलेक्शन लेकर पहुंचे है । एक्सपो दिन के 11 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहेगा और इसमें एंट्री फ्री है । बुनकरों द्वारा निर्मित सिल्क की 1,50,000 से अधिक लेटेस्ट वेरायटी नेशनल सिल्क एक्सपो “ वेडिंग सीज़न स्पेशल “ में उपलब्ध हैं जिसपर विशेष छूट भी प्रस्तावित है, और यह इस आयोजन को और भी आकर्षक बना रही है।

नेशनल सिल्क एक्सपो के इस विशिष्ट संग्रह में तमिलनाडु से कोयंबटूर सिल्क, कांजीवरम सिल्क, कर्नाटक से बेंगलूर सिल्क, क्रेप और जॉर्जेट साड़ी, बेंगलोर सिल्क, रॉ सिल्क मैटेरियल, आन्ध्र प्रदेश से कलमकारी, पोचमपल्ली, मंगलगिरी ड्रेस मैटेरियल उपाडा, गढवाल, धर्मावरम, प्योर सिल्क जरी साड़ी, खादी सिल्क एवं कॉटन ड्रेस मटेरियल सम्मिलित किये गये हैं। इस प्रदर्शनी में कुछ हजार रुपये से लेकर लाखों तक की सिल्क साड़ियां महिलाओं के लिए रखी गई हैं। यहाँ छत्तीसगढ़ से कोसा सिल्क, घिचा सिल्क साड़ी, मलबरी रॉ सिल्क, ब्लॉक प्रिंटेड सिल्क साड़ी, गुजरात से बांधनी, पटोला, कच्छ एम्ब्रोयडरी, गुजराती मिरर वर्क एवं डिजायनर कुर्ती, जम्मू व कश्मीर से तबी सिल्क साड़ी, पश्मिना शाल , चिनोन सिल्क साड़ी, मध्य प्रदेश से चंदेरी, माहेश्वरी कॉटन एण्ड सिल्क साड़ी सूट, उड़ीसा से बोमकाई, संभलपुर, राजस्थान से बंधेज, बांधनी सिल्क साड़ी, एवं महाराष्ट्र की लोकप्रिय जरी पैठणी साडियाँ भी प्रस्तुत की गई हैं।

ग्रामीण हस्तकला विकास समिति के प्रवक्ता और आयोजक श्री जयेश कुमार ने बताया की इस बार नेशनल सिल्क एक्सपो में कश्मीर की तिल्ला वर्क साड़ियाँ और कानी वर्क साड़ियाँ लोगों को काफी पंसद आ रही है। तिल्ला कश्मीर का एक ट्रेडिशनल आर्ट है जो आमतौर पर फेरन और शॉल्स पर किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों में यह काम साड़ी और सूट्स पर भी किया जाने लगा है। यह एक तरह का एम्ब्रॉयडरी का काम होता है जिसमें सोने और चांदी के मेटेलिक धागे भी शामिल होते हैं। इसे बनाने में ढाई महीने लगते हैं। इसके अतिरिक्त तमिलनाडू की गोल्ड जरी की साड़ियाँ भी लोगों को काफी पसंद आ रही है। तमिलनाडु के बुनकरों द्वारा बनायीं सोने और चांदी की जरी की कांजीवरम साड़ियों को लोग रुक-रुककर देख रहे हैं। इनकी कीमत लाखों में है और इन्हें बनाने में 4-6 महीने लगते हैं। जयेश ने बताया कि गोल्ड जरी की कांजीवरम साड़ी में उच्च स्तर के मलबरी सिल्क का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा पशमीना साड़ी व गुजरात पटोला साड़ी की बहुत डिमांड है।

उन्होंने बताया की एक्सपो में रेशम की बुनाई के लिए मशहूर बिहार के भागलपुर से कई बुनकर शादी सीजन जैसे खास मौके पर पहने जाने वाली भागलपुर सिल्क साड़ी की कलेक्शन लेकर पहुंचे है। महिलाओं की पसंदीदा तमिलनाडु की प्योर जरी वर्क की कांजीवरम साड़ी जिसे कारीगर सोने और चांदी के तारों से 30 से 40 दिन में तैयार करते हैं, मैसूर सिल्क साड़ीयों के साथ क्रेप और जॉर्जेट सिल्क, बिहार का टस्सर सिल्क, आंध्र प्रदेश का उपाड़ा, उड़ीसा का मूंगा सिल्क आदि की लेटेस्ट कलेक्शन बुनकर लेकर आए हैं।

सिल्क की साड़ियों को सदाबहार, एलिगेंटऔर स्टेटस सिंबल माना जाता रहा है। साड़ियां इंडियन पहनावे का खास हिस्सा हैं और शादी-ब्याह में तो सिल्क की साड़ियों का अलग ही जलवा होता है। सिल्क का कपड़ा सदियों से शान का प्रतीक है। बात सिल्क की हो तो इसमें फैशन भी है और ट्रेडिशन भी, इसलिए इसकी डिमांड गांव-गांव और शहरों तक है । हिंदुस्तानी सिल्क की मार्केट विदेशों में भी खूब पांव पसार रही है।

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