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आठ एफआईआर फिर भी जेल से बाहर, सीबीआई और ईडी से जांच की मागं।

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जाने-माने समाज सेवी और स्टेट अवार्डी आलमजीत सिंह मान ने कहा कि उनका पंजाब पुलिस के कुछ आला भ्रष्ट अफसरों से भरोसा उठ गया है, इसलिए अब वह भू-माफिया और पुलिस के बीच गठजोड़ का पर्दाफाश करने के लिए मांग करते हैं कि पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई और एन्सफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) से करवाई जाए। मान ने कहा कि बिल्डर अमित नंदा, पवन शर्मा , संजीव खन्ना और गोल्डन सैंड ढकोली और एमएमडी इन्फ्रास्टक्चर्स के हिस्सेदारों के खिलाफ ज़ीरकपुर, डेरा बस्सी, पंचकुला और चंडीगढ़ में आठ आपराधिक मामले, जो आईपीसी की धारा 420 / 406/465/466/467/ 471 / 120 बी के तहत दर्ज हैं, परंतु पंजाब पुलिस इन्हें गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
अपनी व्यथा बताते हुए श्री मान ने कहा कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी श्री दिनकर गुप्ता को बताना चाहते हैं कि पिछले 32 वर्ष से सडक़ दुर्घटनाओं के शिकार लोगों के ईलाज और मृतकों के अंतिम संस्कार करवाने के अलावा नेत्रहीन लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं। और इसके एवज में वह न तो कहीं से चंदा जुटाते हैं, और न ही किसी से कुछ मांगते हैं। अब करोना काल में भी वह 60 हजार मास्क, दस्ताने और सेनेटाईजर अपनी जेब से पैसा खर्च करके बांट चुके हैं। इसके बदले में न किसी सियासी और गैर सियासी मंच से किसी से कोई मदद न ली है और न ही वह भविष्य में लेंगे।
उन्होंने कहा, अब मैंने भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाने का बीड़ा उठाया है। इन पुलिस अफसरों के खिलाफ न तो चुने गए विधायक, मंत्री और सांसद आवाज उठा रहे हैं और न हीं कोई नेता।

मान ने कहा कि उन्हें पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से पूरा न्याय मिल रहा है और वहीं से न्याय की उम्मीद की जा सकती है। उनका मानना है कि हाईकोर्ट में बेशक देर जरूर है, पर अंधेर नहीं है। अगर देश में न्यायिक प्रक्रिया नहीं होती तो रिश्वतखोर पुलिस अधिकारी और दलाल लोग देश को ही बेच कर खा जाते। यही कारण है कि अब उन्होंने भू-माफिया और भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआई और ईडी से जांच की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि उनकी खुद की जमीन गांव सिंहपुरा, जीरकपुर में पड़ी, जिसकी कीमत 100 करोड़ से भी अधिक है। जो भी अधिकारी मोहाली में बतौर एसएसपी तैनात होता है वह भू-माफिया का साथ देना शुरू कर देता है। इनके स्थायी दलाल भू-माफिया और अधिकारियों की सांठ गांठ के चलते भोले भाले लोगों की जमीनों को हड़पने का काम शुरू कर देते हैं। इनमें गोल्डन सैंड ढकोली और एमएमडी इन्फ्रास्टक्चर्स के हिस्सेदार, जिनमें मुख्य तौर पर अमित नंदा, पवन शर्मा, संजीव खन्ना, अंकुश गोयल,आशीष मक्कड़, शामिल हैं, के खिलाफ पुलिस कोई भी कार्रवाई करने से कतरा रही है।

श्री आलमजीत सिंह मान ने खुलासा किया कि वह अब तक तीन याचिकाएं मोहाली के एसएसपी कुलदीप सिंह चहल, एसएसपी स्वपन शर्मा, आईजी आर के जायसवाल, एसपी जगजीत सिंंह जल्ला, गुरशरनदीप सिंह ग्रेवाल और अन्य रिश्वतखोर पुलिस कर्मियों के खिलाफ दायर कर चुके हैं, जिन पर सरकार को नोटिस भी जारी हो चुका है। इसी कारण अब पुलिस और भू माफिया का गिरोह उसे और उसके परिवार को नुक्सान पहुंचा सकता है, परंतु उन्हें परमात्मा पर पूरा भरोसा है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। यह सारा मामला हाईकोर्ट, मुख्यमंत्री और डीजीपी के समक्ष के ध्यान में ला चुके हैं। हाईकोर्ट ने बीती 10 जुलाई 2020 को उनका आग्रह स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार और डीजीपी से मेरे और मेरे परिवार के जान माल की सुरक्षा के लिए जवाब मांगा है।
उन्होंने कहा कि वह यह भी बताना चाहते हैं कि कुछ भ्रष्ट पुलिस वाले और उनके दलाल डीलर उनके विरुद्ध राजनीतिक दबाव के चलते सच्च की आवाज दबाने के लिए झूठे केस दर्ज करवा सकते हैं। उन्होंने कहा, वह 1978 से 1992 तक पंजाब पुलिस में गुंडा राज देख चुके हैं। अब पिछले 15 वर्ष से पंजाब में पुलिस, भू माफिया के गठजोड़ ने सरेआम गदर डाल रखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी से यह भी अनुरोध किया है कि राज्य में ईमानदार अधिकारी तैनात करेंं, अन्यथा भोले भाले लोग मरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

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